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  • विचारों की पवित्रता स्वयं एक स्वास्थ्यवर्धक रसायन है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सम्पत्ति से ज्ञान का मूल्य अधिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कुशल माली बगीचे में खाद पानी के साथ साथ पौधों की काट- छाँट खर पतवार के निष्कासन की व्यवस्था बनाता है। व्यक्तित्व विकास के लिए विकृतियों का परिशोधन और सत्प्रवृत्तियों की स्थापना की दोहरी माली जैसी ही प्रक्रिया अपनानी होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बड़प्पन सादगी, संजीदगी, सज्जनता और सुव्यवस्था में सन्निहित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एकमात्र निःस्वार्थ, निष्कपट और अहैतुकी सेवा ही भगवद्भक्ति की कोटि की है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य जन्म सरल है, पर मनुष्यता कठिन प्रयत्न करके कमानी पड़ती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वैसी ही उदारता बरतो, जैसे ईश्वर ने तुम्हारे साथ बरती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कठिनाइयाँ जीवन की कसौटी है, जिसमें मनुष्य के व्यक्तित्व का रूप निखरता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की उत्कृष्टता संसार की सबसे बड़ी सिद्धि है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् एक विधि- व्यवस्था है, जो आग या बिजली की तरह मात्र सदुपयोग की शर्त पर अनुग्रह करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य का जीवन कठिनाइयों में पलकर ही खिलता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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