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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अवसर की प्रतीक्षा में मत बैठो। आज का अवसर ही सर्वोत्तम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्प्रयत्न कभी निरर्थक नहीं होते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय की कद्र करो, एक मिनट भी फिजूल मत गँवाओ


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दिवा स्वप्र न देखो। बिना पंख के उड़ाने न भरो। वह करो जो आज की परिस्थितियों में किया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर विश्वास का फलितार्थ है- आत्मविश्वास और सदाशयता के सत्परिणामों पर भरोसा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना स्वर्ग स्वयं ही बनाएँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की बुराई, दोष दर्शन अपने ही विकृत आन्तरिक जीवन का दर्शन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कुविचारों से बचिए और दुर्भावनाएँ हटाइए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो आस्तिक है, उसकी आशा कभी क्षीण नहीं हो सकती। वह केवल उज्ज्वल भविष्य पर ही विश्वास रख सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म तरह- तरह की कामनाओं की पूर्ति के लिए किये जाने वाले कर्मकाण्ड का नाम नहीं, वह मानवीय आदर्शों के अनुरूप आचरण पद्धति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो तुम दूसरे से चाहते हो, उसे पहले स्वयं करो।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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