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  • अपने हृदय में अपने कार्य की पवित्रता पर पूर्ण विश्वास रखने वाले तथा दरिद्र और विपत्तिग्रस्त भाइयों को मुक्त करने के लिए अपने प्राणों तक का उत्सर्ग कर डालने का साहस रखने वाले वीर पुरुषों की ही आज भारतवर्ष को आवश्यकता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्भावनाओं से खाली हृदय श्मशान की तरह सूना और भयंकर बना रहता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आदर्शों ने सदैव जीवन में उतारने के बाद फायदा ही पहुँचाया है, नुकसान किसी का नहीं किया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य बने रहने का अर्थ है- आत्म भावना का परिष्कार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही जीवित है, जिसका मस्तिष्क ठण्डा, रक्त गरम, हृदय कोमल और पुरुषार्थ प्रखर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य का कल्याण परम पिता परमात्मा की शरण में जाने से ही संभव है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मीठा बोलने वाला शत्रु को भी मित्र बना लेता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भक्ति अन्तः से उफन कर आने वाली परहित के लिए त्याग- समर्पण की भावना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    काल (समय) सबसे बड़ा देवता है। उसका निरादर मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी मनुष्य के लिए देने योग्य यदि कोई उत्कृष्ट वस्तु हो सकती है तो वह है- प्रेम।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी और कर्तव्य परायणों के लिए सुरक्षित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुषों के पास यदि क्षात्रतेज है, तो नारी के पास ब्रह्मतेज


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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