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  • सच्चरित्रता संसार की सर्वोपरि सम्पत्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की प्यास ज्ञानरूपी अमृत से ही परितृप्त होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जैसा आज का बाल समुदाय होगा, वैसा ही देश का भविष्य बनेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की पवित्रता एवं श्रेष्ठता संसार में सर्वोपरि है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार हमारे ही मन का प्रतिबिम्ब है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिष्कृत दृष्टिकोण की प्रखरता का चिह्न है- समस्त विश्व ब्रह्माण्ड भगवान् की साकार प्रतिमा दीख पडे़ और उसे सुविकसित बनाने के लिए अपने मनोयोग युक्त श्रम बिन्दुओं की श्रद्धाञ्जलि समर्पण करने की भक्ति- भावना जागे।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवत्व का संस्कार प्रदान करने वाली नारी, स्रष्टा की विशेष कृति एवं शक्तिस्वरूपा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्बुद्धि संसार का सबसे मूल्यवान् धन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पूर्ण मनुष्यत्व पाने के लिए अपने आपको वश में करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनन और चिंतन के बिना न आत्म- साक्षात्कार होता है और न ईश्वर ही मिलता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों को पीड़ा न देना ही मानव धर्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य एक भटका हुआ देवता है। सही दिशा में चल सके तो उससे बढ़कर श्रेष्ठ और कोई नहीं


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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