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  • जो दीपक की तरह प्रकाश उत्पन्न करने को तैयार है, प्रभु की ज्योति का अवतरण उसी में होगा।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने दोषों की ओर से अनभिज्ञ रहने से बड़ा प्रमाद इस संसार में और कोई नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समाधि- उत्तरोत्तर विकसित होने वाली एक उच्च स्तरीय सुदृढ़ मनोभूमि है, जिसमें अनगढ़ मन को शनैः शनैः साधा एवं दीक्षित किया जाता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खोया हुआ धन पाया जा सकता है, पर खोया हुआ समय नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने दोषों की ओर से अनभिज्ञ रहने से बढ़कर प्रमाद इस संसार में और कोई दूसरा नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता है, ईश्वर नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्यार्थी वह, जिसमें ज्ञान की पिपासा हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रेष्ठ व्यक्तित्वों के गढ़ने की टकसाल है- युगतीर्थ शान्तिकुंज।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में विद्या से बढ़कर कोई मित्र नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की प्यास ज्ञानरूपी अमृत से ही परितृप्त होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार निर्माण एक विशिष्ट स्तर की साधना है। उसमें योगी जैसी प्रज्ञा और तपस्वी जैसी प्रतिभा का परिचय देना पड़ता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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