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  • फल की आतुरता प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छ रहना देवत्व के समीप रहना है ।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अगले दिनों देवासुर संग्राम होने वाला है उसमें मनुष्य और मनुष्य आपस में नहीं लड़ेंगे, वरन् आसुरी और दैवी प्रवृत्तियों में जमकर अपने - अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष होगा। असुरता अपने पैर जमाये रहने के लिए देवत्व अपनी स्वर्ग संभावनाएँ चरितार्थ करने के लिए भरसक चेष्टा करेंगे। इस विचार संघर्ष में देवत्व के विजयी हो जाने पर वे परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी, जिनमें हर व्यक्ति को उचित न्याय, स्वातन्त्र्य, उल्लास, साधन और संतोष मिल सके।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म निर्माण का अर्थ है भाग्य निर्माण।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य के मित्र और शत्रु उनके ही अपने भाव, विचार और दृष्टिकोण ही होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो असत्य को अपनाता है, वह सब कुछ खो बैठता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हमारी उपासना एक है- समर्पण की, श्रद्धा की। हमने नाले की तरह से अपने आपको नदी के साथ में मिला दिया है और उसमें मिल जाने की वजह से हमारी हैसियत, हमारी औकात, हमारी शक्ति और हमारा स्वरूप नदी जैसा बन गया है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशा और पुरुषार्थ को न छोड़ना आस्तिकता का प्रथम चिह्न है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग्यता और परिस्थिति को ध्यान में रखकर महात्वाकांक्षाएँगढ़ने वाला दुखी रहता और उपहास सहता है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आप समय को नष्ट करेंगे तो समय भी आपको नष्ट कर देगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देने का आनन्द पाने के आनन्द से बड़ा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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