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  • अपनी मानसिक अवस्थाओं को वश में करो, उत्तेजनाओं का शासन अस्वीकार कर दो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    युग परिवर्तन का पहला कार्य है- अपना परिवर्तन।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन का अर्थ है -  समय जो जीवन से प्यार करते हों, वे आलस्य में समय न गँवाए


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अशिक्षित होना बहुत बड़ा अभिशाप है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जवानी का अर्थ है - निर्भयता और कुछ नया करने, नये- नये अनुभव करने की भूख।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी पुरुष की पूरक सत्ता है। वह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन भगवान् सत्ता की साकार प्रतिमा है।


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    निरक्षरता मनुष्य जीवन का बहुत बड़ा कलंक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही काम करना ठीक है, जिसे करके पछताना न पड़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सहनशीलता, शिष्टाचार, करुणा एवं सौजन्य नारी की अमूल्य निधियाँ हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुष से पुरुषोत्तम, नर से नारायण बनने का अभ्यास ही उपासना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योद्धा दूसरों का सिर काटने वाले को नहीं कहते ।। सच्चे शूरवीर वे हैं जो अपनी पशु प्रवृत्तियों को महामानवों के स्तर तक बदलने में अपने प्रचण्ड पराक्रम का परिचय दे सकें।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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