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  • श्रेष्ठता और संस्कृति का पहला गुण स्वच्छता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब - रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हजार मन सोचने से एक मन करना अच्छा है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर प्रेम का मापदण्ड एक ही है -आदर्शों से घनिष्ठ रूप से जुड़ जाना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    फालतू समय को फिजूल कार्यों से बचाकर ज्ञान प्राप्ति में लगाएँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता है, ईश्वर नहीं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्बुद्धि रूपी प्रसन्नता हमारे अन्तर में छिपी पडी़ है, उसे प्रेरित- प्रसन्न करते ही कष्टों की निशा समाप्त हो जाती है और आनन्द रूपी सूर्य की किरणें अपने चारों ओर बिखरी हुई दिखाई पड़ती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खुद साफ रहो, सुरक्षित रहो और औरों को भी रोगों से बचाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सांसारिक वासना को तुम भयानक रोग की तरह समझो, संयम को औषधि की तरह समझो। वासनारहित जीवन ही स्वस्थ जीवन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना सच्ची है या झूठी, इसकी एक ही परीक्षा है कि साधक की अंतरात्मा में संतोष, प्रफुल्लता, आशा विश्वास और सद्भावना का कितनी मात्रा में अवतरण हुआ?


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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