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  • जिस आदर्श के व्यवहार का प्रभाव न हो, वह फिजूल है और जो व्यवहार आदर्श प्रेरित न हो, वह भयंकर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में रहने का सच्चा तत्त्वज्ञान यही है कि रोजाना एक बार खिलखिलाकर जरूर हँस लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बिना पढ़े- लिखे का भविष्य अन्धकारमय है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी महान् उद्देश्य को न चलना उतनी लज्जा की बात नहीं होती, जितनी कि चलने के बाद कठिनाइयों के भय से पीछे हट जाना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर पाप से बहुत कुढ़ता है और हमारी चौकीदारी के लिए अदृश्य रूप से हर घडी़ साथ रहता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सभ्यता चरित्र का वह स्वरूप है जो मनुष्य कर्तव्य का मार्ग दर्शाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा जिसके जीवन में कोई विशेष अभ्युदय- अनुग्रह करना चाहता है, उसकी बहुत- सी सुविधाओं को समाप्त कर दिया करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर किसी के भाग्य में कुछ किसी के में कुछ लिख कर पक्षपात नहीं करता और न भविष्य को पहले से ही तैयार करके किसी के कर्म करने की स्वतंत्रता में बाधा डालता है। हर आदमी अपनी इच्छानुसार कर्म करने में पूर्ण स्वतंत्र है। कर्मों के अनुसार ही हम सब फल प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छ रहना देवत्व के समीप रहना है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्तम ज्ञान और सद्विचार कभी भी नष्ट नहीं होते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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