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  • नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गलती को ढूँढ़ना, मानना और सुधारना ही मनुष्य का बड़प्पन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इक्कीसवीं सदी- नारी सदी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का पिछड़ापन मनुष्यता का अपराध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन की कोई भी साधना कठिनाइयों में होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशा और पुरुषार्थ को न छोड़ना आस्तिकता का प्रथम चिह्न है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की निन्दा और त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का अपमान बर्बरता का प्रतीक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सर्वव्यापी ईश्वर की दृष्टि में हमारा गुप्त- प्रकट आचरण या भाव छिप नहीं सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज के काम को कल पर मत टालिए



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य की आत्मा में जो श्रेष्ठता है, वह कभी मर नहीं सकती।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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