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  • नारी के हाथ में संसार की समस्त निराशा और कटुता मिटाने की क्षमता विद्यमान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारियों  जागो, अपने को पहचानो


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तप के लक्षण हैं- शक्ति संचय, परिश्रम, उत्साह, दृढ़ता और लगन।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जिसे अपनी शरण में लेते हैं, जिसे बन्धन मुक्त करना चाहते हैं, उसके अनिवार्य कर्म भोगों को जल्दी- जल्दी भुगतवा कर उसे ऐसा ऋण मुक्त बना देते हैं कि भविष्य के लिए कोई बन्धन शेष न रहे और भक्त को फिर जन्म- मरण के चक्र में न पड़ना पडे़


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी अहिंसा की साक्षात् मूर्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गायत्री माता का आँचल श्रद्धापूर्वक पकड़ने वाला जीवन में कभी निराश नहीं रहता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र हमारे अन्तर का दीपक है, उसे सदैव प्रज्वलित रखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने जीवन से प्यार करो तो वह तुम्हें प्यार करेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसने शिष्टता और नम्रता नहीं सीखी, उनका बहुत सीखना भी व्यर्थ रहा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी संसार एवं सृष्टि की आराध्य देवी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बुरे प्रभावों से बचना, उनका प्रतिकार करना, इसी का नाम संयम है, जो मनुष्य में योग्यता पैदा कर उसे प्रभावशाली बनाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सदाचार सदैव ही अमिट रहता है और निष्ठा के अनुरूप बहुत काल तक लोगों का आन्तरिक और प्रभावशाली मार्गदर्शन करता रहता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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