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  • सारे काम करते रहकर अथवा काम छोड़कर भी जैसी भी परिस्थिति हो, मनुष्य ज्ञानार्जन का प्रयत्न अवश्य करता रहे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्म ही पूजा है और कर्तव्यपालन भक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दिनचर्या को व्यवस्थित बना देना आरोग्य की गारंटी है। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी बेईमान व्यक्ति का कोई सच्चा मित्र नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है, परन्तु इनके परिणामों में चुनावों की कोई सुविधा नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्याध्ययन एक तप है, जिसकी तेज से विद्यार्थी तपकर कुन्दन बनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नर की शक्ति है- नारी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने कार्यों में व्यवस्था, नियमितता, सुन्दरता, मनोयोग तथा जिम्मेदारी का ध्यान रखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हिन्दू धर्म विश्व धर्म बनेगा और वेद मंत्रों से ब्रह्माण्ड गूँजेगा। भारत विश्व का मार्गदर्शक बनेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भलमनसाहत का व्यवहार करने वाला एक चमकता हुआ हीरा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिष्कृत दृष्टिकोण की प्रखरता का चिह्न है- समस्त विश्व ब्रह्माण्ड भगवान् की साकार प्रतिमा दीख पडे़ और उसे सुविकसित बनाने के लिए अपने मनोयोग युक्त श्रम बिन्दुओं की श्रद्धाञ्जलि समर्पण करने की भक्ति- भावना जागे।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में विद्या से बढ़कर कोई मित्र नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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