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  • राजहंस दूध पीते हैं, जल छोड़ देते हैं। मोती चुगते हैं, कीड़े नहीं खाते। ऐसी व्रतशीलता निभाकर कोई भी श्रेष्ठ बन सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी घर के देवालय में अवस्थित एक प्रत्यक्ष देवी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह सच्चा साहसी है, जो कभी निराश नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय ही मानव जीवन की सच्ची सम्पत्ति है।


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    दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रयत्न करते रहने पर सफलता मिलती ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विचारों की पवित्रता स्वयं एक स्वास्थ्यवर्धक रसायन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आराम की जिन्दगी एक तरह से मौत का निमंत्रण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का जितना भाग व्यवहार में लाया जा सके वही सार्थक है, अन्यथा वह गधे पर लदे बोझ के समान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा के निवास मंदिर शरीर को अपनी बुरी आदतों से नष्ट भ्रष्ट करना पाप है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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