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  • हृदय में सदैव शुद्ध भावना रखकर ही भगवान् का अनुभव किया जा सकता हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने हृदय में अपने कार्य की पवित्रता पर पूर्ण विश्वास रखने वाले तथा दरिद्र और विपत्तिग्रस्त भाइयों को मुक्त करने के लिए अपने प्राणों तक का उत्सर्ग कर डालने का साहस रखने वाले वीर पुरुषों की ही आज भारतवर्ष को आवश्यकता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो असत्य को अपनाता है वह सब कुछ खो बैठता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की पुकार अनसुनी न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् का हो जाने का अर्थ है- स्वयं को उनके प्रति समर्पित कर देना, उनसे भिन्न इच्छाएँ न रखना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जमाना तब बदलेगा, जब हम स्वयं बदलेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नैतिक अनाचार, राजनैतिक भ्रष्टाचार एवं सामाजिक कुरीतियों के जंजाल से निकलें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी महान् उद्देश्य को न चलना उतनी लज्जा की बात नहीं होती, जितनी कि चलने के बाद कठिनाइयों के भय से पीछे हट जाना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर की प्रसन्नता का सबसे बडा़ उपहार कर्तव्य- पालन को मानें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर तेरी इच्छा पूर्ण हो जीवन का यही मूलमंत्र हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर विश्वास का फलितार्थ है- आत्मविश्वास और सदाशयता के सत्परिणामों पर भरोसा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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