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  • इस संसार में कमजोर रहना सबसे बड़ा अपराध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य मात्र का यह कर्तव्य है कि वह परम आध्यात्मिक शक्ति के रूप में माँ की प्रतिष्ठा प्रदान करें, प्रत्येक नारी में भाव वत्सला नारी का रूप देखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की निन्दा करके किसी को कुछ नहीं मिला, जिसने अपने को सुधारा उसने बहुत कुछ पाया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने कुछ होने का अहंकार ही व्यक्ति को उसके गौरव से वंचित करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भलमनसाहत का व्यवहार करने वाला एक चमकता हुआ हीरा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिष्टता सभ्यता की आधारशिला है ओर अशिष्टता अनगढ़पन की प्रतिक्रिया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसने शिष्टता और नम्रता नहीं सीखी, उनका बहुत सीखना भी व्यर्थ रहा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नैतिकता, प्रतिष्ठाओं में सबसे अधिक मूल्यवान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कायर मृत्यु से पूर्व अनेकों बार मर चुकता है, जबकि बहादुर को मरने के दिन ही मरना पड़ता है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म का अर्थ है- अपने आपको सही करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्कर्मपरायण आत्माएँ परमात्मा के ही समतुल्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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