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  • नारी पुरुष की पूरक सत्ता है। वह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा ही आत्मा का सहायक है। दूसरा और भला कौन सहायक हो सकता है? आत्म- संयम से मनुष्य दुर्लभ सहायता को प्राप्त कर लेता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्तव्यशील मनुष्य ही धार्मिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अच्छे काम का प्रयोग अपने से ही आरम्भ करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी आद्यशक्ति की प्रतीक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भक्ति अन्तः से उफन कर आने वाली परहित के लिए त्याग- समर्पण की भावना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अज्ञान ही मानव जाति का सबसे बड़ा शत्रु है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही काम करना ठीक है, जिसे करके पछताना न पड़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की अवमानना का अर्थ है- अपनी उद्गम शक्ति की गरिमा को गिराना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रसुप्त देवत्व का जागरण ही सबसे बड़ी ईश्वर पूजा है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य बने रहने का अर्थ है- आत्म भावना का परिष्कार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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