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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मन का नियन्त्रण मनुष्य का एक आवश्यक कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कमला नेहरू-  "स्वाधीनता ईश्वर प्रदत्त शक्ति है और उस पर स्त्री- पुरुष दोनों का समान अधिकार है।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्तम पुस्तकें जाग्रत् देवता हैं। उनके अध्ययन- मनन के द्वारा पूजा करने पर तत्काल ही वरदान पाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् एक विधि- व्यवस्था है, जो आग या बिजली की तरह मात्र सदुपयोग की शर्त पर अनुग्रह करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की निन्दा करके किसी को कुछ नहीं मिला, जिसने अपने को सुधारा उसने बहुत कुछ पाया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    डाँ. ऐनीबेसेण्ट- "किसी भी राष्ट्र का निर्माण अकेले पुरुष पर नहीं हो सकता। राष्ट्र की स्त्रियाँ पत्नी- रूप में अपने पतियों को साहस प्रदान करती है तथा मातृ रूप से भावी संतति को इस प्रकार शिक्षित करती हैं, जिससे कि वह स्वतन्त्रता, आत्म सम्मान और आचरण की उच्चता के लिए किए गये हमारे प्रयत्नों का अनुगमन कर सके। कोई भी पक्षी एक पंख से नहीं उड़ सकता, इसी प्रकार कोई भी राष्ट्र स्त्री और पुरुष दोनों में से किसी एक वर्ग के द्वारा उन्नत नहीं हो सकता।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी को श्रेय- सम्मन देने वाले अपने अनुदान की तुलना में असंख्य गुना प्रतिफल प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर का विश्वास सत्कर्मों की कसौटी पर परखा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्विचार ही स्वर्ग और कुविचार ही नरक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रशंसा और प्रतिष्ठा वही सच्ची है, जो उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्राप्त हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो तुम दूसरों से चाहते हो, उसे पहले तुम स्वयं करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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