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  • नारी व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र की जननी ही नहीं, वह जगज्जननी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    काल (समय) सबसे बड़ा देवता है। उसका निरादर मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवात्मा का परमात्मा से जुड़ जाने का नाम योग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में विद्या से बढ़कर कोई मित्र नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गुण ही नारी का सच्चा आभूषण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन- मरण भगवान् के हाथ में होता है। वह किसी के बुलाए आता नहीं और किसी के टाले टलता नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निर्मल हृदय में ही भगवान का बोध होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी गुण -सौन्दर्य बढ़ाएँ, आभूषण नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारियों  जागो, अपने को पहचानो


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् सज्जनों के लिए दीनबन्धु और दुष्टों के लिए काल रूप हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बिगड़ी क्यों भारत की साख, भीख माँगते अस्सी लाख।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परोपकार करना दूसरों की सेवा करना और उसमें जरा भी अहंकार न करना यही सच्ची शिक्षा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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