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  • मनोविकारों से परेशान, दुःखी, चिंतित मनुष्य के लिए उनके दुःख- दर्द के समय श्रेष्ठ पुस्तकें ही सहारा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान जीवन का प्रकाश बिन्दु है, जो मनुष्य को सभी द्वन्द्वों, उलझनों, अन्धकारों से निकालकर शाश्वत पथ पर अग्रसर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर भक्ति का अर्थ है - आदर्शों के प्रति असीम प्यार। असीम का तात्पर्य है- इतना प्रबल कि उसे क्रियान्वित किये बिना रहा ही न जा सके।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आलस्य से आराम मिल सकता है, पर यह आराम बड़ा महँगा पड़ता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्गुण है सच्ची संपत्ति, दुर्गुण सबसे बड़ी विपत्ति।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छता सभ्यता का प्रथम सोपान है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह मत करो, जिसके लिए पीछे पछताना पड़े |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर विश्वास का अर्थ है- उत्कृष्टता के प्रति असीम श्रद्धा रखने वाला साहस।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अन्तःकरण की सुन्दरता साधना से बढ़ती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गन्दे फूहड़ चित्र हटाओ, माँ- बहिनों की लाज बचाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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