• सफल सार्थक जीवन
  • प्रगति की आकांक्षा
  • सुव्यवस्थित पारिवारिक संबंध
  • बाल निर्माण
  • मानवीय गरिमा
  • गायत्री और यज्ञ
  • भारतीय संस्कृति
  • धर्म और विज्ञान
  • समय का सदुपयोग
  • स्वस्थ जीवन
  • आध्यात्मिक चिंतन धारा
  • भाव संवेदना
  • शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री
  • कर्मफल और ईश्वर
  • स्वाध्याय और सदविचार
  • प्रेरक विचार
  • समाज निर्माण
  • युग निर्माण योजना
  • वेदो से दिव्य प्रेरणाये
  • शिक्षा और विद्या
  • पराये धन के प्रति लोभ पैदा करना अपनी हानि करना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    व्यक्तिगत, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में संव्याप्त अगणित दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध व्यापक परिमाण में संघर्ष आरम्भ किया जाये। इसलिए हर नागरिक को अनाचार के विरुद्ध आरम्भ किये धर्म युद्ध में भाग लेने के लिए आह्वान करना होगा। किसी समय तलवार चलाने वाले और सिर काटने में अग्रणी लोगों को योद्धा कहा जाता था, अब माप दण्ड बदल गया। चारों ओर संव्याप्त आतंक और अनाचार के विरुद्ध संघर्ष में जो जितना साहस दिखा सके और चोट खा सके उसे उतना बड़ा बहादुर माना जायेगा। उस बहादुरी के ऊपर ही शोषण में विहीन समाज की स्थापना संभव हो सकेगी। दुर्बुद्धि से कुत्सा और कुण्ठा से लड़ सकने में जो लोग समर्थ होंगे उन्हीं का पुरुषार्थ पीड़ित मानवता को त्राण दे सकने का यश संचित कर सकेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    आत्मा को सुख से नहीं, पुण्य से शान्ति मिलती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    अगर तुमने खुद पर शासन करना सीख लिया, तो तुम सारी दुनिया पर शासन करने का दावा कर सकते हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    भलमनसाहत का व्यवहार करने वाला एक चमकता हुआ हीरा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    उत्कृष्ट जीवन का स्वरूप है- दूसरों के प्रति नम्र और अपने प्रति कठोर होना।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    शिक्षा आत्मा का भोजन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    पेट और मस्तिष्क स्वास्थ्य की गाड़ी को ठीक प्रकार चलाने वाले दो पहिये हैं। इनमें से एक बिगड़ गया तो दूसरा भी बेकार ही बना रहेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    आशावाद आस्तिकता है और निराशा नास्तिकता, आशावादी केवल ईश्वर से डरता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    ज्ञान आत्मा का नेत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    नारी के हाथ में संसार की समस्त निराशा और कटुता मिटाने की क्षमता विद्यमान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email

    श्रेष्ठता और संस्कृति का पहला गुण स्वच्छता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
    Share on Google+ Email