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  • आप चाहते है कि आपको बीमारी न सतावे तो स्वास्थ्य के नियमों पर दृढ़तापूर्वक चलना प्रारंभ कर दीजिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी को आत्म- विश्वास जगाने वाला प्रोत्साहन देना ही सर्वोत्तम उपहार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हजार मन सोचने से एक मन करना अच्छा है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिन्हें लम्बी जिंदगी जीनी हो, वे बिना कड़ी भुख लगे कुछ भी न खाने की आदत डालें ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बुद्धिमान् वह है, जो किसी की गलतियों से हानि होते देखकर अपनी गलतियाँ सुधार लेता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सबके सुख में ही हमारा सुख सन्निहित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो कुछ बच्चे को सिखलाते, उसे स्वयं कितना अपनाते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने उत्तरदायित्वों को निभाएँ , महान् बनें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आस्तिकता का अर्थ है- ईश्वर के नियम- अनुशासन में दृढ़ विश्वास।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का शीलवान् होना किसी भी अलंकार से बढ़कर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ‘स्वाध्यायन्मा प्रमदः’ अर्थात् स्वाध्याय में प्रमाद न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाध्याय को जीवन में निश्चित स्थान दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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