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  • हम क्या करते हैं, इसका महत्त्व कम है, किन्तु हम किस भाव से करते हैं, इसका बहुत महत्त्व है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्साहित्य सत्पुरुषों का मूर्तिमान हृदय एवं मस्तिष्क है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जब तक हम ईश्वर की बताई राह पर चलते हैं वह हमारी सहायता करता है। जब कुमार्ग पर चलते हैं तो मुसीबतों में फँसा कर झिड़क देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जिसे सच्चे मन से प्यार करते हैं, उसे अग्नि परीक्षाओं में होकर गुजारते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्त्रियों का गौरव लज्जाशीलता में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना सच्ची तभी है, जब जीवन में ईश्वर घुल जाए।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवता और कोई नहीं, मनुष्य शरीर में निवास करने वाली सत्प्रवृत्तियाँ ही हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना का अर्थ- भगवान् के नाम की माला फेरना ही नहीं है, बल्कि आदर्शों की नीतियों को जीवन में प्रतिष्ठित रखना भी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी महान् संभावनाओं पर अटूट विश्वास ही सच्ची आस्तिकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धिक्कार है उस राष्ट्र को, जिसका हर सूबा अपने को एक राष्ट्र समझता है। धिक्कार है उस सूबे को जिसका हर कबीला अपने को एक सूबा समझता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का प्रथम आधार आस्तिकता -  ईश्वर विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खोजें सभी जगह अच्छाई, ऐसी दृष्टि सदा सुखदायी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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