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  • सद्ज्ञान से भरी हुई पुस्तकें देवताओं के समान है, जो दिव्य विचारों से हमें लाभान्वित करती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्विचारों का क्रियात्मक रूप ही सेवा है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी को श्रेय- सम्मन देने वाले अपने अनुदान की तुलना में असंख्य गुना प्रतिफल प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विपरीत परिस्थितियों में भी हँसी- खुशी का जीवन बिताने का अभ्यास व्रत कहलाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसने शिष्टता और नम्रता नहीं सीखी, उनका बहुत सीखना भी व्यर्थ रहा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गंगा की गोद, हिमालय की छाया, ऋषि विश्वामित्र की तपःस्थली, अजस्र प्राण ऊर्जा का उद्भव स्रोत गायत्री तीर्थ शान्तिकुञ्ज जैसा जीवन्त स्थान गायत्री उपासना के लिए दूसरा ढूँढ सकना कठिन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पूर्ण मनुष्यत्व पाने के लिए अपने आपको वश में करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान के अभाव में मनुष्य अन्धा रहता है और कर्म के अभाव में पंगा।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक अपने घर में ही देखना चाहो तो मुसकान में स्वर्ग उतरना और विग्रह के साथ जुड़ा हुआ नरक कभी भी प्रत्यक्ष देख लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की पुकार अनसुनी न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की आराधना से ही मनुष्य तुच्छ से महान् बनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अश्लील पोस्टर और गन्दे चित्र स्वयं के अस्तित्व, परिवार और समाज पर लगा कालिख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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