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  • संसार में कोई विभूति ऐसी नहीं, जो तीव्र आकांक्षा और प्रबल पुरुषार्थ के आधार पर प्राप्त न की जा सकती हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महानता के लक्षण- सादा जीवन, उच्च विचार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    राजहंस दूध पीते हैं, जल छोड़ देते हैं। मोती चुगते हैं, कीड़े नहीं खाते। ऐसी व्रतशीलता निभाकर कोई भी श्रेष्ठ बन सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के काम में लग जाने वाला कभी घाटे में नहीं रह सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म क्षेत्र में लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कदम बढा़ने पड़ते हैं, उनमें से एक का नाम है- परिशोधन और दुसरा है- परिष्कार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम बदलेंगे युग बदलेगा- हम सुधरेंगे- युग सुधरेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनके भीतर- बाहर एक ही बात है, वही निष्कपट व्यक्ति धन्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गृहस्थ एक तपोवन है, जिसमें संयम,सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म आत्मा की पुकार है, ईश्वर का निर्णय है और विश्व कल्याण का वास्तविक कारण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की उत्कृष्टता संसार की सबसे बड़ी सिद्धि है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस समाज, देश अथवा परिवार में नारी को उचित अधिकार देकर उन्नति तथा विकास का अवसर देकर सहयोगिनी बना लिया जाता है उस राष्ट्र, समाज तथा परिवार में सुख- शान्ति तथा वैभव, समृद्धि के रूप में स्वर्ग की ही स्थापना हो जाया करती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो तुम दूसरे से चाहते हो, उसे पहले स्वयं करो।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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