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  • ईश्वर भक्ति का अर्थ है - आदर्शों के प्रति असीम प्यार। असीम का तात्पर्य है- इतना प्रबल कि उसे क्रियान्वित किये बिना रहा ही न जा सके।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुस्तकालय हमारा गुरु है, जो अज्ञान के अन्धकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्कृष्टता का दृष्टिकोण ही जीवन को सुरक्षित एवं सुविकसित बनाने का एकमात्र उपाय है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी माँ के रूप में बच्चे की आदिगुरु है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    लोकमंगल का परमार्थ और उसके सहारे अपनी सत्प्रवृत्तियों का संवर्धन ही आराधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नित्य गायत्री जप, उदित होते स्वर्णिम सविता का ध्यान, नित्य यज्ञ, अखण्ड दीप का सान्निध्य, दिव्यनाद की अवधारणा, आत्मदेव की साधना की दिव्य संगम स्थली है- शान्तिकुंज गायत्री तीर्थ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो अपने प्रति ईमानदार होता है वही दूसरों के प्रति भी ईमानदार हो सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य उपाधियों से नहीं, श्रेष्ठ कार्यों से सज्जन बनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    घमण्डी के लिए कोई ईश्वर नहीं। ईर्षालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मातृसत्ता का अपमान राष्ट्रीय कलंक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन भगवान् सत्ता की साकार प्रतिमा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा की ओर जाने वाला ज्ञानदान करना सर्वश्रेष्ठ भगवद्भक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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