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  • व्यायाम वह सुखद श्रम है, जिससे संगठन, एकता, अनुशासन एवं ब्रह्मवर्चस की भावनाएँ जाग्रत होती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पर्दा प्रथा नारीत्व का अपमान है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की एकमात्र प्यास परमात्मा- सा बनने की है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही उन्नति कर सकता है, जो स्वयं को उपदेश देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पीढ़ियों को सुसंस्कृत बनाना है, तो महिलाओं को सुयोग्य बनाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बढ़ते जिससे मनोविकार, ऐसी कला नरक का द्वार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धन नहीं, चरित्र मूल्यवान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मानुशासन और आत्म- संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के आदर्शों पर चलने का साहस जो दिखाते हैं, उनके हितों की रक्षा का ध्यान स्वयं रखते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब - रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पराये धन के प्रति लोभ पैदा करना अपनी हानि करना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ विचारों से स्नान करा देना ही ध्यान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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