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  • जिसने अन्तःकरण की शरण ले ली है, उसे कोई भी भय नहीं प्रभावित कर पाता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छता भरी सादगी नारी का सर्वोपरि श्रृंगार है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसके पास जितने सद्गुण हैं, वह उतना ही बड़ा अमीर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देने का आनन्द पाने के आनन्द से बड़ा है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ‘ईश्वर तेरी इच्छा पूर्ण हो’- जीवन का यही मूलमंत्र हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् सज्जनों के लिए दीनबन्धु और दुष्टों के कालरूप हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सौन्दर्य फैशन में नहीं, वरन् हृदय के आदर्श गुणों में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का गुण लज्जा, भय या संकोच नहीं; बल्कि विनय, आत्म- श्रद्धा, निर्भयता, शुचिता और आत्म सौन्दर्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रभु की राह पर बढ़ाया गया हर कदम अपनी आत्मिक प्रगति के लिए किया गया प्रयास है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार मत करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्विचारों से बड़ा उपहार और कोई इस संसार में हो नहीं सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र ही मनुष्य की श्रेष्ठता का उत्तम मापदण्ड है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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