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  • जिन्दादिली, उत्साह, माधुर्य, जोश और शक्ति ही हमें जीने योग्य बनाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म- विश्वास पूर्वक भगवान् को साथ लेकर कार्य करने से विपरीत परिस्थितियों में भी मार्ग निकाला जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र हमारे अन्तर का दीपक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक अपने घर में ही देखना चाहो तो मुसकान में स्वर्ग उतरना और विग्रह के साथ जुड़ा हुआ नरक कभी भी प्रत्यक्ष देख लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी धरती है, नर उससे उत्पन्न होने वाले पौधे हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सुप्रसिद्ध अमरीकी लेखिका- हेलन केलर- "मुझे ईश्वर में विश्वास है, मुझे मनुष्य में विश्वास है, मुझे आत्मा की शक्ति में विश्वास है। मैं अपना पवित्र कर्तव्य समझती हूँ कि अपने साथ- साथ दूसरों के मन में उत्साह भरूँ और ईश्वर की इस सृष्टि के विरुद्ध कोई शब्द मुँह से निकलने न दूँ; क्योंकि जिस संसार को ईश्वर ने अच्छा बनाया है और जिसे हजारों- लाखों लोगों ने अच्छा बनाये रखने के लिए निरन्तर संघर्ष किया है, उससे शिकायत करने का किसी को अधिकार नहीं।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए और युद्ध करके भी उसे प्राप्त करना चाहिए और कभी- कभी बलप्रयोग से भी उसे स्थापित करना चाहिए। यह बात एक घर और एक राष्ट्र दोनों ही के लिए लागू है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की अवमानना का अर्थ है- अपनी उद्गम शक्ति की गरिमा को गिराना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर निष्पक्ष न्यायकारी है। उसके दरबार में किसी का मूल्य उसकी प्रामाणिकता एवं परमार्थ परायणता के आधार पर ही आँका जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सलाह सबकी सुनो, पर करो वह जिसके लिए तुम्हारा साहस और विवेक समर्थन करे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने अज्ञान को दूर करके मन- मन्दिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जिसे सच्चे मन से प्यार करते हैं, उसे अग्नि परीक्षाओं में होकर गुजारते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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