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  • सद्बुद्धि रूपी प्रसन्नता हमारे अन्तर में छिपी पडी़ है, उसे प्रेरित- प्रसन्न करते ही कष्टों की निशा समाप्त हो जाती है और आनन्द रूपी सूर्य की किरणें अपने चारों ओर बिखरी हुई दिखाई पड़ती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विश्व कल्याण का मार्ग है - नारी उत्थान।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् का अनुग्रह जहाँ साथ है, वहाँ असंभव जैसी कोई चीज शेष नहीं रह जाती।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो टूटे को बनाना और रूठे को मनाना जानता है, वही बुद्धिमान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शरीर को देखकर मनुष्य होना पहचाना जाता है और भावना देख कर उसका दैत्य या देवता होना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस प्रकार कुम्हार अपने चाक पर उँगलियों के कौशल से गीली मिट्टी को किसी भी प्रकार के बर्तन में बदल सकता है, उसी प्रकार नारी अपने पिता और परिवार के छोटे- बड़े सभी सदस्यों को इच्छानुरूप ढालने- बदलने में समर्थ है


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    झूठ बोलना एक छोटी किन्तु बहुत बुरी आदत है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता है, ईश्वर नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी के हाथ में संसार की समस्त निराशा और कटुता मिटाने की क्षमता विद्यमान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अन्तःकरण को अशुद्ध वासनाओं से बचाइए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वार्थ, अहंकार और लापरवाही की मात्रा बढ़ जाना ही किसी व्यक्ति के पतन का कारण होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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