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  • अगर तुमने खुद पर शासन करना सीख लिया, तो तुम सारी दुनिया पर शासन करने का दावा कर सकते हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी वाक्शक्ति का दुरुपयोग न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी ने ही अपने वैभव शक्ति से लक्ष्मी का रूप रचा, ज्ञान शक्ति से सरस्वती और शौर्य शक्ति से दुर्गा का रूप धारण किया। प्राणी मात्र के अन्दर नारी का यह त्रिशक्ति रूप ही परिलक्षित होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में विद्या से बढ़कर कोई मित्र नहीं और अविद्या से बढ़कर कोई शत्रु नहीं ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार निर्माण एक विशिष्ट स्तर की साधना है। उसमें योगी जैसी प्रज्ञा और तपस्वी जैसी प्रतिभा का परिचय देना पड़ता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मन का संकल्प और शरीर का पराक्रम यदि किसी काम में पूरी तरह लगा दिया जाय तो सफलता मिल कर रहेगी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुष को पुरुषोत्तम, आत्मा को परमात्मा, नर को नारायण और लघु को महान् बनाने की विधा का नाम अध्यात्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा अपने अनुग्रह आत्म- विश्वासी पर बरसाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परम्पराओं की तुलना में विवेक को महत्त्व दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस संसार में कमजोर रहना सबसे बड़ा अपराध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना याचना नहीं है, वह विशुद्ध रूप से आत्म परिष्कार, जीवन शोधन और पवित्रता के विकास की सुनियोजित प्रक्रिया है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्म तो सभी करते हैं, पर जब वह सदुद्देश्यों के साथ जुड़ जाता है, तो योग बन जाता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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