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  • जो तुम दूसरे से चाहते हो, उसे पहले स्वयं करो।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो दुःख तुम्हारे वश में नहीं उसके लिए भगवान् से प्रार्थना करो और जो दुःख तुमने पैदा किये हैं, उनको स्वयं दूर करने का प्रयत्न करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानवता की सेवा से बढ़कर और कोई काम बड़ा नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चोर, उचक्के, व्यसनी, जुआरी भी अपनी बिरादरी निरंतर बढ़ाते रहते हैं ।। इसका एक ही कारण है कि उनका चरित्र और चिंतन एक होता है। दोनों के मिलन पर ही प्रभावोत्पादक शक्ति का उद्भव होता है। किंतु आदर्शों के क्षेत्र में यही सबसे बड़ी कमी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का पिछड़ापन मनुष्यता का अपराध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यश अपयश मरण के उपरान्त भी सुगंध दुर्गंध की तरह चिरकाल तक बना रहता है। वस्तुतः यही मनुष्य का बहुमूल्य उपार्जन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विवेक और पुरुषार्थ जिसके साथी हैं, वही प्रकाश प्राप्त करेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वासना, तृष्णा, क्षुद्रता और मोह निद्रा की अपेक्षा करते हुए कर्तव्यपालन और परमार्थ की आकांक्षाएँ जाग्रत करना ही जागरण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् का हो जाने का अर्थ है- स्वयं को उनके प्रति समर्पित कर देना, उनसे भिन्न इच्छाएँ न रखना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मूर्ख को उसी मूढ़ता के अनुसार उत्तर न देना। ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महात्मा बुद्ध का कथन है कि अन्तःकरण भी एक मुख है। दर्पण में हम अपना मुख देखते हैं तथा सौन्दर्य देखकर प्रमुदित होते हैं। हमारे मुँह पर यदि धब्बे या कालौंच आदि होती है तो उसे भी सप्रयास छुटाने की चेष्टा करते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इस अन्तःकरण रूपी मुख को भी हम नित्यप्रति चेतना के दर्पण में देखें- परखें और उसके सौन्दर्य में अभिवृद्धि करें। आत्मनिरीक्षण करके देखें कि किन- किन कषाय कल्मषों ने आत्मा के अनन्त सौन्दर्य को आच्छादित कर रखा है। कामनाओं और वासनाओं ने कहीं उसे पथ- भ्रष्ट तो नहीं कर रखा? आशा और तृष्णा रूपी भयंकर ग्रहोने अपने चंगुल में उसे जकड़ तो नहीं रखा? जब इन प्रश्नों का उत्तर ‘नहीं’ में मिलने लगेगा तो व्यक्ति तुच्छ से महान, लघु से विराट् और नर से नारायण बन जायेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर नारी देवी कहलाए, अबला क्यों ?? सबला कहलाए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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