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  • नारी का गुण लज्जा, भय या संकोच नहीं; बल्कि विनय, आत्म- श्रद्धा, निर्भयता, शुचिता और आत्म सौन्दर्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यसनों के वश में होकर अपनी महत्ता को खो बैठे वह मूर्ख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है; परन्तु इनके परिणामों में चुनाव की कोई सुविधा नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य का अपने आप से बढ़कर न कोई शत्रु है, न मित्र।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऊँचे उठो, प्रसुप्त को जगाओ, जो महान् है उसका अवलम्बन करो और आगे बढ़ो


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सबसे बड़ी कोई सहायता है तो वह है कठिनाई के वक्त किसी की मदद करना।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा के सन्तोष का ही दूसरा नाम स्वर्ग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्या का दान सर्वोत्कृष्ट दान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अच्छाइयों का एक- एक तिनका चुन- चुनकर जीवन भवन का निर्माण होता है, पर बुराई का एक हल्का झोंका ही उसे मिटा डालने के लिए पर्याप्त होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्त्री, पुरुष की परस्परावलम्बी हो, आश्रित नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी प्रकृति की बेटी है। सृष्टि की परम सौन्दर्यमयी सर्वश्रेष्ठ कृति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का मार्ग फूलों की सेज नहीं, इसमें बड़े- बड़े कष्ट सहन करने पड़ते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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