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  • संस्कारवान् माताएँ ही उन्नत समाज का निर्माण करती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के काम में लग जाने वाले कभी घाटे में नहीं रह सकते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी को स्वावलम्बी बनने दिया जाए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तीन लक्ष्य - स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन, सभ्य समाज।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवत्व का संस्कार प्रदान करने वाली नारी, स्रष्टा की विशेष कृति एवं शक्तिस्वरूपा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अनजान होना उतनी लज्जा की बात नहीं, जितनी सीखने के लिए तैयार न होना ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी मात्र को हम पवित्र दृष्टि से देखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना स्वर्ग स्वयं ही बनाएँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीभ पर काबू रखो, स्वाद के लिए नहीं, स्वास्थ्य के लिए खाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आदर्श परिवार ही एक सशक्त समाज की आधारशिला है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धनवान् नहीं, चरित्रवान् सुख पाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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