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  • परमात्मा ज्ञानस्वरूप है। विचार और ज्ञान के रूप में ही वह मानवीय अंतःकरण में प्रकाश और प्रेरणा उत्पन्न करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्साहित्य सत्पुरुषों का मूर्तिमान हृदय एवं मस्तिष्क है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशावादी हर परिस्थिति में भी अवसर देखता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का प्रथम आधार आस्तिकता -  ईश्वर विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग्यता बढ़ाओ, पात्रता विकसित करो ताकि अभीष्ट वस्तुएँ सरलतापूर्वक मिल सकें। समुद्र के पास नदियाँ बिना बुलाये ही जा पहुँचती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जब तक हम ईश्वर की बताई राह पर चलते हैं वह हमारी सहायता करता है। जब कुमार्ग पर चलते हैं तो मुसीबतों में फँसा कर झिड़क देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस समाज, देश अथवा परिवार में नारी को उचित अधिकार देकर उन्नति तथा विकास का अवसर देकर सहयोगिनी बना लिया जाता है उस राष्ट्र, समाज तथा परिवार में सुख- शान्ति तथा वैभव, समृद्धि के रूप में स्वर्ग की ही स्थापना हो जाया करती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य बदलने की एकमात्र शर्त है- उन्नति के लिए सच्चा और निरन्तर संघर्ष।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी को पददलित करना, परावलम्बी बनाना निकृष्टतम कार्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम बदलेंगे तो हमारी दुनिया भी बदलेगी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का असली श्रृंगार सादा जीवन उच्च विचार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी जीवन की ज्योति है, प्राणों का सम्बल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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