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  • मनुष्य से संबंधित विचार


    केवल ज्ञान ही एक ऐसा अक्षय तत्त्व है, जो कहीं भी, किसी अवस्था और किसी काल में भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य ऋषियों, तपस्वियों, मनस्वियों और मनीषियों का वंशधर है ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है; परन्तु इनके परिणामों में चुनाव की कोई सुविधा नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य और कुछ नहीं, मात्र भटका हुआ देवता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे सदाचार् कहते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईशानः बधं यवय
    अर्थात्- मनुष्य अपनी परिस्थितियों का निर्माता आप है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य के पास अपना कहलाने वाला जो कुछ है, वह नारी का अनुदान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य दीन- हीन बनता है, अपने ही कारण तथा ईश्वर के समकक्ष बनने का श्रेय पाता है, तो वह भी अपने ही कारण।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गलती को ढूँढ़ना, मानना और सुधारना ही मनुष्य का बड़प्पन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य एक अनगढ़ पत्थर है जिसे शिक्षा की छैनी एवं हथौड़ी से सुन्दर आकृति प्रदान की जाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी पुरुष की पूरक सत्ता है। वह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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