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  • भाग्य से संबंधित विचार


    जो जैसा सोचता और करता है, वह वैसा ही बन जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता है, ईश्वर नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य पर नहीं, चरित्र पर निर्भर रहो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर मनुष्य का भाग्य उसकी मुट्ठी में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म- निर्माण का ही दूसरा नाम भाग्य निर्माण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य पर नहीं, चरित्र पर निर्भर रहो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देश और भविष्य की सम्भावना देखनी है तो आज के बच्चों का स्तर देखो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुर्भाग्य छोटे हृदय को दमन कर अपने वश में कर लेता है, परन्तु विशाल हृदय उस पर विजय पाकर खुद उसे दबा देते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य भरोसे बैठे रहने वाले आलसी सदा दीन- हीन ही रहेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता है, ईश्वर नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य परिस्थितियों का गुलाम नहीं, अपने भाग्य का निर्माता और विधाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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