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  • सत्प्रवृत्ति से संबंधित विचार


    सम्पत्ति बहुतों के पास होती है, पर उसका सदुपयोग बहुत कम लोग जानते हैं। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अनाचार बढ़ता है कब, सदाचार चुप रहता जब।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुष्टता का प्रतिरोध ईश्वरीय कार्य है। उसमें पाप नहीं, पुण्य ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्भावनाओं और सत्प्रवृत्तियों से जिसका जीवन जितना ओतप्रोत है, वह उतना ही ईश्वर के सन्निकट है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवता और कोई नहीं, मनुष्य शरीर में निवास करने वाली सत्प्रवृत्तियाँ ही हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर दिव्य चेतना है, अतः सद्गुणों और सत्प्रवृत्तियों के रूप में ही उसे देखा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् एक विधि- व्यवस्था है, जो आग या बिजली की तरह मात्र सदुपयोग की शर्त पर अनुग्रह करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईर्ष्या न करें, प्रेरणा ग्रहण करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तप का अर्थ है सदुद्देश्यों के लिए अनवरत श्रम और आवश्यकता पड़ने पर कष्ट सहन।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग शब्द में जिन गुणों का बोध होता है, सफाई और शुचिता उनमें सर्वप्रमुख है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर दिव्य चेतना है। अतः उसे सद्गुणों और सत्प्रवृत्तियों के रूप में ही देखा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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