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  • आदर्श से संबंधित विचार


    परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं, वरन् शक्ति है। उत्कृष्ट आदर्श- वादी आस्थाओं, आकांक्षाओं के रूप में ही उसकी अनुभूति की जा सकती है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो आदर्श जीवन बनाने और बिताने के लिए जितना इच्छुक, आतुर एवं प्रयत्नशील हैं, वह उतने ही अंशों में आस्तिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म तरह- तरह की कामनाओं की पूर्ति के लिए किये जाने वाले कर्मकाण्ड का नाम नहीं, वह मानवीय आदर्शों के अनुरूप आचरण पद्धति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सिर काटने वाला वीर नहीं। वीरता आदर्श के निमित्त अड़ जाने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग के दो पक्ष हैं- उत्कृष्ट चिंतन और आदर्श कर्तव्य। जिसके अंतःकरण में इन दोनों की प्रतिष्ठापना हो गई, तो समझना चाहिए कि उसने मनुष्य शरीर में रहते हुए ही देवयोनि प्राप्त कर ली।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् केवल उन्हीं की सहायता करता है, जो बडे़ उद्देश्यों के लिए अपने आपको सौंप देते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आदर्शों के साथ लिपटी हुई आत्मीयता ही भक्ति भावना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सौन्दर्य फैशन में नहीं, वरन् हृदय के आदर्श गुणों में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देश और भविष्य की सम्भावना देखनी है तो आज के बच्चों का स्तर देखो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के आदर्शों पर चलने का साहस जो दिखाते हैं, उनके हितों की रक्षा का ध्यान स्वयं रखते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस आदर्श के व्यवहार का प्रभाव न हो, वह फिजूल है और जो व्यवहार आदर्श प्रेरित न हो, वह भयंकर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सार्थकता उसी शिक्षा की है जो छात्र को विनम्र, सुव्यवस्थित और आदर्शवादी बना सके।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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