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    अगर तुमने खुद पर शासन करना सीख लिया, तो तुम सारी दुनिया पर शासन करने का दावा कर सकते हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संतोष, संयम, सच्चाई, सज्जनता और भक्ति की संतुलित मनोभूमि बनाये रखना ही स्वर्ग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बुरे प्रभावों से बचना, उनका प्रतिकार करना, इसी का नाम संयम है, जो मनुष्य में योग्यता पैदा कर उसे प्रभावशाली बनाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मज्ञान, आत्मसम्मान और आत्मसंयम ही मनुष्य को महती शक्ति की ओर ले जाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संयम के बिना जीवन का विकास नहीं होता। जीवन के सितार पर हृदयमोहक मधुर संगीत उसी समय गूँजता है, जब उसके तार नियम तथा संयम से बँधे होते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संयम विहीन जीवन शुष्क एवं पशु के समान निःसार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अगर तुमने खुद पर शासन करना सीख लिया, तो तुम सारी दुनिया पर शासन करने का दावा कर सकते हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आहार विहार, निंद्रा पर नियन्त्रण रखो, ऐसा करने से स्वस्थ रहेंगे और ज्ञान द्वारा सुख रूप परमात्मा की प्राप्ति कर सकोगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    रोग वे दण्ड है जो स्वास्थ्य के सम्बन्ध में भूल करने या संयम से दूर रहने के कारण भोगने पड़ते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वीर वह है जिसने दूसरों को परास्त कर दिया। बहादुरों में भी बहादुर वह है, जिसने अपने को जीत लिया।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सांसारिक वासना को तुम भयानक रोग की तरह समझो, संयम को औषधि की तरह समझो। वासनारहित जीवन ही स्वस्थ जीवन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वीर्य संचित होने से मस्तिष्क में प्रबल शक्ति आती है और इस महती शक्ति के सहारे एकाग्रता साधन करना सहज हो जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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