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  • व्यवहार से संबंधित विचार


    दूसरों के साथ वह व्यवहार न करें, जो अपने लिए पसंद नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही जीवित है, जिसका मस्तिष्क ठण्डा, रक्त गरम, हृदय कोमल और पुरुषार्थ प्रखर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ सदैव नम्रता, मधुरता, सज्जनता, उदारता एवं सहृदयता का व्यवहार करें।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सादगी सबसे बड़ा फैशन है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वास्तविक सौन्दर्य के आधार हैं- स्वस्थ शरीर, निर्विकार मन और पवित्र आचरण।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक बनेंगे नेक बनेंगे, स्वस्थ बनेंगे सभ्य बनेंगे


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान और आचरण में जो सामंजस्य पैदा कर सके, उसे ही विद्या कहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मूर्ख को उसी मूढ़ता के अनुसार उत्तर न देना। ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईष्या आदमी को उसी तरह खा जाती है, जैसे कपड़ों को कीड़ा


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सादगी में ही सज्जनता और सुसंस्कारिता सन्निहित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दीपक बोलता नहीं, प्रकाश से अपना परिचय देता है। तुम अपने सम्बन्ध में बढ़- चढ़ कर बातें न करो, लोगों की कृतियाँ देखकर वस्तुस्थिति जानने का अवसर दो।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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