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  • नारी से संबंधित विचार


    नारी का असली श्रृंगार, सादा जीवन उच्च विचार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी शीलवती बनी रहे, किन्तु संकोची नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इक्कीसवीं सदी- नारी सदी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्गुण ही नारी का सच्चा श्रृंगार और जेवर- गहने हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार को स्वर्ग बनाने की प्रकृति प्रदत्त क्षमता नारी में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुषों के पास यदि क्षात्रतेज है, तो नारी के पास ब्रह्मतेज


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की क्षमता विकसित करने में लगाया गया श्रम, मनोयोग एवं धन असंख्यों गुना होकर लौटता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी   परिवार को श्रेष्ठता से अभिपूरित, धरती को स्वर्ग बनाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र की जननी ही नहीं, वह जगज्जननी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी मानव सृष्टि की वह धारा है, जो सर्वदा शीतल होकर बहती है और गर्म होना जानती ही नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का अपमान बर्बरता का प्रतीक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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