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  • चरित्र से संबंधित विचार


    जमाना तब बदलेगा, जब हम स्वयं बदलेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धनवान् बनना इतना आवश्यक नहीं कि उसके लिए ईमान छोड़ दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    घर में टँगे हुए जो चित्र, घोषित करते व्यक्ति- चरित्र।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शीलवान् होना किसी भी अलंकार से बढ़कर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग्यता बढ़ाओ, पात्रता विकसित करो ताकि अभीष्ट वस्तुएँ सरलतापूर्वक मिल सकें। समुद्र के पास नदियाँ बिना बुलाये ही जा पहुँचती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक सत्य का आधार ही व्यक्ति को भवसागर से पार कर देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्रवान् व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में भगवद् भक्त हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी प्रशंसा आप न करें; यह कार्य आपके सत्कर्म स्वयं करा लेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नैतिकता, प्रतिष्ठाओं में सबसे अधिक मूल्यवान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य पर नहीं, चरित्र पर निर्भर रहो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गन्दे फूहड़ चित्र हटाओ, माँ- बहिनों की लाज बचाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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