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    सादगी सबसे बड़ा फैशन है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    घर में टँगे हुए जो चित्र, घोषित करते व्यक्ति- चरित्र।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चोर, उचक्के, व्यसनी, जुआरी भी अपनी बिरादरी निरंतर बढ़ाते रहते हैं ।। इसका एक ही कारण है कि उनका चरित्र और चिंतन एक होता है। दोनों के मिलन पर ही प्रभावोत्पादक शक्ति का उद्भव होता है। किंतु आदर्शों के क्षेत्र में यही सबसे बड़ी कमी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रेष्ठता प्राप्त करने का अभ्यास आवेश या अंधानुकरण पर आधारित न हो, अन्यथा अधिक देर तक उसमें टिके रहना संभव नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य पर नहीं, चरित्र पर निर्भर रहो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो पाप का पश्चाताप करता है वह साधु है और जो पाप पर अभिमान करता है वह शैतान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य पर नहीं, चरित्र पर निर्भर रहो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्रवान् व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में भगवद् भक्त हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक सत्य का आधार ही व्यक्ति को भवसागर से पार कर देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्रवान् व्यक्ति जब विकसित होता है तब उदार हो जाता है, परमार्थ- परायण हो जाता है, लोकसेवी हो जाता है, जनहितकारी हो जाता है और वह अपनी क्षुद्र स्वार्थ, संकीर्णताओं को कम करके लोकहित में, परमार्थ हित में अपने स्वार्थ को देखना शुरू कर देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग्यता बढ़ाओ, पात्रता विकसित करो ताकि अभीष्ट वस्तुएँ सरलतापूर्वक मिल सकें। समुद्र के पास नदियाँ बिना बुलाये ही जा पहुँचती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऐसे ईश्वर को खोज निकालें । जो चरित्र बन कर साथ- साथ रह सके ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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