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  • उपासना से संबंधित विचार


    हमारी उपासना एक है- समर्पण की, श्रद्धा की। हमने नाले की तरह से अपने आपको नदी के साथ में मिला दिया है और उसमें मिल जाने की वजह से हमारी हैसियत, हमारी औकात, हमारी शक्ति और हमारा स्वरूप नदी जैसा बन गया है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानवता एवं उत्कृष्टता का दूसरा नाम है- आस्तिकता। उपासना इसी का अभ्यास करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण विज्ञानसम्मत मानसिक व्यायाम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य के दैनिक आवश्यक कर्तव्यों में ईश्वर उपासना सबसे प्रमुख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्ध्योपासना मनुष्य का परम आवश्यक धर्म कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब - रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना आत्मा की वैसी ही आवश्यकता है, जैसी शरीर को प्राण की।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना का अर्थ- भगवान् के नाम की माला फेरना ही नहीं है, बल्कि आदर्शों की नीतियों को जीवन में प्रतिष्ठित रखना भी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा को परमात्मा बनने की प्रेरणा उपासना से मिलती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना याचना नहीं है, वह विशुद्ध रूप से आत्म परिष्कार, जीवन शोधन और पवित्रता के विकास की सुनियोजित प्रक्रिया है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना का प्रतिफल है- सुसंस्कारिता और साधना का प्रयोजन है- शालीनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा की सच्ची पूजा सद्व्यवहार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना उसी की फलित होती है, जो उसे साधना के खाद- पानी से सींचता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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