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    परिश्रम ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ब्रह्मचर्य ही जीवन है, तेज है, शक्ति है और सामर्थ्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का गौरव चौके- चूल्हे तक सीमित रहने में नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निश्चय समझ रखिए कि अगर हमारा जीवन संयममय हो जाएगा तो हम जो चाहेंगे प्राप्त कर सकेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म जिज्ञासा- आत्म कल्याण का मुख्य द्वार है। जो उसे पा लेता है, वह अपनी जीवन यात्रा की मंजिल भी आसानी से प्राप्त कर लेता है,


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो ब्रह्मचारी नहीं है, जिन्होंने कुछ कमाया नहीं, जिन्होंने कुछ सीखा नहीं, वे अपने अन्तिम क्षणों में टूटे हुए धनुष के समान अपने अतीत की याद कर- कर आँसू बहाते रहते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योद्धा दूसरों का सिर काटने वाले को नहीं कहते ।। सच्चे शूरवीर वे हैं जो अपनी पशु प्रवृत्तियों को महामानवों के स्तर तक बदलने में अपने प्रचण्ड पराक्रम का परिचय दे सकें।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन और जगत् की प्रत्येक घटना को प्रभु की लीला- अनुकंपा मानकर चलना चाहिए। सुख- दुःख में, मान- अपमान में, लाभ- हानि में संतुलित व्यक्ति ही सुखी रहता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गुण, कर्म एवं स्वभाव के परिष्कार की प्रयोगशाला है- परिवार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ब्रह्मचर्य ही जीवन है, तेज है, शक्ति है और सामर्थ्य है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    लज्जा और विनय ही नारी का आभूषण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी अहिंसा की साक्षात् मूर्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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