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    उत्तम पुस्तकें जाग्रत् देवता हैं। उनके अध्ययन- मनन के द्वारा पूजा करने पर तत्काल ही वरदान पाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिश्रम ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    लज्जा और विनय ही नारी का आभूषण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान के क्षेत्र में नारी अनादिकाल से नर के समान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक कर्तव्य है, जिसे पूरी तरह निभाया जाए।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ब्रह्मचर्य ही जीवन है, तेज है, शक्ति है और सामर्थ्य है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निश्चय समझ रखिए कि अगर हमारा जीवन संयममय हो जाएगा तो हम जो चाहेंगे प्राप्त कर सकेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन जीना, आदर्श और उद्देश्य के लिए संग्राम करना है। जीवन जागरण की धारा है। जब तक जियो प्रतिज्ञाबद्ध जियो। अपने जीवन का सच्चा उद्देश्य तलाश करो और जब एक बार उसे जान लो तो उसे प्राप्त करने के लिए जुट जाओ। जियो और विजय प्राप्त करो। (अखण्ड ज्योति-१९४०, अक्टूबर १)


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी शीलवती बनी रहे, किन्तु संकोची नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी अहिंसा की साक्षात् मूर्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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