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    विपरीत परिस्थितियों में भी जो ईमान, साहस और धैर्य को कायम रख सके,वस्तुतः वही सच्चा शूरवीर है |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मबल ही इस संसार का सबसे बड़ा बल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महान कार्य शक्ति के सहारे नहीं, दूरदर्शिता के बल पर सम्पन्न होते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है, पर निराशावादी प्रत्येक अवसर में कठिनाइयाँ ही खोजता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हारता वह है जो हिम्मत गवाँ बैठता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जहाँ अदम्य साहस और दूरदर्शिता है, वहाँ सब कुछ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चाहे कितनी भी प्रतिकूलताएँ आएँ, तुम्हें लक्ष्य अवश्य पूरा करना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस संसार में कमजोर रहना सबसे बड़ा अपराध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यायाम वह सुखद श्रम है, जिससे संगठन, एकता, अनुशासन एवं ब्रह्मवर्चस की भावनाएँ जाग्रत होती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कठिनाइयाँ जब आती हैं तो कष्ट देती हैं, पर जब जाती है तो आत्म बल का ऐसा उत्तम पुरस्कार दे जाती हैं जो उन कष्टों दुखों की तुलना में हजारों गुना मूल्यवान होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की सहायता वे ही लोग कर सकते हैं, जिनके पास अपना वैभव और पराक्रम हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का सबसे बड़ा बल ‘आत्मबल’ गायत्री साधक को प्राप्त होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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