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  • कर्तव्य से संबंधित विचार


    कर्तव्यों के विषय में आने वाले कल की कल्पना एक अंध- विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रयत्न से सांसारिक समृद्धि मिलती है, प्रयत्न से आत्मिक सम्पदायें मिलती हैं, प्रयत्न से परमात्मा मिलता है, इसलिए प्रयत्न ही प्रधान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर का प्यार केवल सदाचारी और कर्त्तव्यपरायणों के लिए सुरक्षित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सभ्यता चरित्र का वह स्वरूप है जो मनुष्य कर्तव्य का मार्ग दर्शाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हमारा कर्तव्य है कि हम जिसे सही समझते है, निर्भय होकर करते रहें। जिसे गलत समझते हैं, उसके आगे किसी भी कीमत पर न झुकें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य के हाथ में केवल कर्तव्य- पालन ही है, फल ईश्वर के हाथ में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी और कर्तव्य परायणों के लिए सुरक्षित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वासना, तृष्णा, क्षुद्रता और मोह निद्रा की अपेक्षा करते हुए कर्तव्यपालन और परमार्थ की आकांक्षाएँ जाग्रत करना ही जागरण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर की प्रसन्नता का सबसे बडा़ उपहार कर्तव्य- पालन को मानें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्तव्य मार्ग पर चलने में आने वाले कष्टों को स्वेच्छा और शान्ति से सहन करना ही सच्ची तपस्या है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में सच्चा सुख ईश्वर और धर्म पर विश्वास रखते हुए पूर्ण परिश्रम के साथ अपना कर्तव्य पालन करने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक कर्तव्य है, जिसे पूरी तरह निभाया जाए।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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