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  • ईश्वर से संबंधित विचार


    निरभिमानी धन्य है; क्योंकि उन्हीं के हृदय में ईश्वर का निवास होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् पर विश्वास करने का अर्थ है- अपने पर, अपने पुरुषार्थ पर और अपने उज्ज्वल भविष्य पर विश्वास करना।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् को धोखा नहीं दिया जा सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य के दैनिक आवश्यक कर्तव्यों में ईश्वर उपासना सबसे प्रमुख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर- प्रेम का मापदण्ड एक ही है- आदर्शों से घनिष्ठ रूप से जुड़ जाना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के आदर्शों पर चलने का साहस जो दिखाता है, उनके हितों की रक्षा का ध्यान भगवान् स्वयं रखते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर को मात्र नाम स्मरण से नहीं, उसके कामों के प्रति लगनशील रहकर ही प्रसन्न किया जा सकता है |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा केवल विवेकरूपी दिव्य चक्षुओं से देखा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् दिव्य चेतना के रूप में हैं, उन्हें बिना बताये ही सब कुछ मालूम रहता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा की सृष्टि का हर व्यक्ति समान है। चाहे उसका रंग, वर्ण, कुल और गोत्र कुछ भी क्यों न हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर की कृपा और जीव का पुरुषार्थ मिलकर असंभव कार्य को संभव बना देते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो सचमुच प्रेम करता है उसका हृदय धरती पर साक्षात स्वर्ग है। ईश्वर उसमें बसता है क्योंकि ईश्वर प्रेम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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