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    अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ विचारों से स्नान करा देना ही ध्यान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुष्प की तरह खिलें, चंदन की तरह सुगंधित बनें तो, भगवान् भी सिर पर रखेंगे। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बड़प्पन शालीनता से मिलता है। पद और प्रतिष्ठा तो उसे चमकाते भर हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शालीनता बिना मोल मिलती है, परन्तु उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है, जो वाणी से नहीं,अपने आचरण से प्रस्तुत किया जाता है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो महापुरुष बनने के लिए प्रयत्नशील हैं, वे धन्य हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रशंसा और प्रतिष्ठा वही सच्ची है, जो उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्राप्त हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो असंभव कार्य को सम्भव करके दिखाए, उसे ही ‘प्रतिभा’ कहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईमानदार होने का अर्थ है हजार मनकों में से अलग चमकने वाला हीरा ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिष्टता सभ्यता की आधारशिला है ओर अशिष्टता अनगढ़पन की प्रतिक्रिया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कुशल माली बगीचे में खाद पानी के साथ साथ पौधों की काट- छाँट खर पतवार के निष्कासन की व्यवस्था बनाता है। व्यक्तित्व विकास के लिए विकृतियों का परिशोधन और सत्प्रवृत्तियों की स्थापना की दोहरी माली जैसी ही प्रक्रिया अपनानी होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बनो न फैशन के दीवाने, करो आचरण मत मनमाने।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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