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    शिष्टता सभ्यता की आधारशिला है ओर अशिष्टता अनगढ़पन की प्रतिक्रिया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शालीनता बिना मोल मिलती है, परन्तु उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनकी तुम प्रशंसा करते हो, उनके गुणों को अपनाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रशंसा और प्रतिष्ठा वही सच्ची है, जो उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्राप्त हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है, जो वाणी से नहीं,अपने आचरण से प्रस्तुत किया जाता है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महापुरुषों में ही महापुरुष उत्पन्न करने की क्षमता होती है। हाथियों के समूह में ही हाथी बढ़ते और पलते हैं। मूषक तो कुतरने वाली बिरादरी में ही बढ़ते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यक्तित्व युक्त आदमी सदा अपने मन पर काबू रखते है और अपने आपको मानसिक अवस्थाओं के वशवर्ती नहीं होने देते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उनसे दूर रहो जो भविष्य को निराशाजनक बताते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुष्प की तरह खिलें, चंदन की तरह सुगंधित बनें तो, भगवान् भी सिर पर रखेंगे। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बनो न फैशन के दीवाने, करो आचरण मत मनमाने।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनके भीतर- बाहर एक ही बात है, वही निष्कपट व्यक्ति धन्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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