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  • गायत्री से संबंधित विचार


    बुद्धि को निर्मल, पवित्र एवं उत्कृष्ट बनाने वाला महामंत्र है- गायत्री मंत्र।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नित्य गायत्री जप, उदित होते स्वर्णिम सविता का ध्यान, नित्य यज्ञ, अखण्ड दीप का सान्निध्य, दिव्यनाद की अवधारणा, आत्मदेव की साधना की दिव्य संगम स्थली है- शान्तिकुंज गायत्री तीर्थ।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गायत्री माता का आँचल श्रद्धापूर्वक पकड़ने वाला जीवन में कभी निराश नहीं रहता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गंगा की गोद, हिमालय की छाया, ऋषि विश्वामित्र की तपःस्थली, अजस्र पाण ऊर्जा का उद्भव स्रोत गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज जैसा जीवन्त स्थान गायत्री उपासना के लिए दूसरा ढूँढ सकना कठिन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बहिरंग ही नहीं, अंतरंग को बदलने वाले गुरुकुल- आरण्यक है ‘गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गंगा की गोद, हिमालय की छाया, ऋषि विश्वामित्र की तपःस्थली, अजस्र पाण ऊर्जा का उद्भव स्रोत गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज जैसा जीवन्त स्थान गायत्री उपासना के लिए दूसरा ढूँढ सकना कठिन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नर और नारी दोनों ही वर्ग वेदमाता गायत्री के कन्या और पुत्र हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आस्तिकता का अर्थ है- ईश्वर को मानना। मानने का अर्थ है- उसका अनुयायी होना और अनुयायी होने का तात्पर्य है- उसके विचार, निर्देशों एवं आदर्श के अनुसार चलना।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का सबसे बड़ा बल ‘आत्मबल’ गायत्री साधक को प्राप्त होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नित्य गायत्री जप, उदित होते स्वर्णिम सविता का ध्यान, नित्य यज्ञ, अखण्ड दीप का सान्निध्य, दिव्यनाद की अवधारणा, आत्मदेव की साधना की दिव्य संगम स्थली है- शान्तिकुंज गायत्री तीर्थ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गायत्री को इष्ट मानने का अर्थ है -  सत्प्रवृत्ति की सर्वोत्कृष्टता पर आस्था।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रतिभाओं की ढलाई का समर्थ संयंत्र है- ब्रह्मवर्चस गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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