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    धर्म से आशय है- अभ्युदय और निःश्रेयस् अर्थात उन गति- विधियों को अपनाया जाना, जो कल्याण एवं प्रगति का शालीनतायुक्त पथ प्रशस्त कर सकने की क्षमता रखती हों।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म- मनुष्योचित कर्तव्यों को पहचानने तथा करने से सधता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म आत्मा की पुकार है, ईश्वर का निर्णय है और विश्व कल्याण का वास्तविक कारण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का उद्देश्य मानव को पथ भ्रष्ट होने से बचाना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना सुख- वैभव दूसरों को बाँटना और दूसरों के प्रति ममता की वृद्धि ही धार्मिकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यक्तिगत, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में संव्याप्त अगणित दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध व्यापक परिमाण में संघर्ष आरम्भ किया जाये। इसलिए हर नागरिक को अनाचार के विरुद्ध आरम्भ किये धर्म युद्ध में भाग लेने के लिए आह्वान करना होगा। किसी समय तलवार चलाने वाले और सिर काटने में अग्रणी लोगों को योद्धा कहा जाता था, अब माप दण्ड बदल गया। चारों ओर संव्याप्त आतंक और अनाचार के विरुद्ध संघर्ष में जो जितना साहस दिखा सके और चोट खा सके उसे उतना बड़ा बहादुर माना जायेगा। उस बहादुरी के ऊपर ही शोषण में विहीन समाज की स्थापना संभव हो सकेगी। दुर्बुद्धि से कुत्सा और कुण्ठा से लड़ सकने में जो लोग समर्थ होंगे उन्हीं का पुरुषार्थ पीड़ित मानवता को त्राण दे सकने का यश संचित कर सकेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में सच्चा सुख ईश्वर और धर्म पर विश्वास रखते हुए पूर्ण परिश्रम के साथ अपना कर्तव्य पालन करने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म तरह- तरह की कामनाओं की पूर्ति के लिए किये जाने वाले कर्मकाण्ड का नाम नहीं, वह मानवीय आदर्शों के अनुरूप आचरण पद्धति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म शब्द का अर्थ है- धारणा। यहाँ धारणा से तात्पर्य उन आदर्शों की अंतरंग से प्रतिष्ठापना से है, जो व्यक्ति और समाज की श्रेष्ठता और सद्भावना की दिशा में प्रेरित करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्ध्योपासना मनुष्य का परम आवश्यक धर्म कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का प्रथम आधार आस्तिकता -  ईश्वर विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या से ही भुनाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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