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    पीढ़ियों को सुसंस्कृत बनाना है, तो महिलाओं को सुयोग्य बनाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पराये धन के प्रति लोभ पैदा करना अपनी हानि करना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईर्ष्या और द्वेष की आग में जलने वाले अपने लिए सबसे बड़े शत्रु हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवत्व का संस्कार प्रदान करने वाली नारी, स्रष्टा की विशेष कृति एवं शक्तिस्वरूपा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अज्ञान और कुसंस्कारों से छूटना ही मुक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यसनों के वश में होकर अपनी महत्ता को खो बैठे वह मूर्ख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पाप अपने साथ रोग,शोक पतन ओर संकट भी लेकर आता है |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो जन्म- जन्मान्तरों की संचित पशु- प्रवृत्तियों का नियमन कर सकता है, वह योगी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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