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    जिस भी साधना में दुष्प्रवृत्ति तपाई, जलाई जा रही हो ऐसा कोई कृत्य तप है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गृहस्थ एक तपोवन है, जिसमें संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गृहस्थ एक तपोवन है, जिसमें संयम,सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म परिष्कार की साधना का नाम ही अध्यात्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यायाम वह सुखद श्रम है, जिससे संगठन, एकता, अनुशासन एवं ब्रह्मवर्चस की भावनाएँ जाग्रत होती हैं ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक क्रान्तिकारी विश्वविद्यालय है। अनौचित्य की नींव हिला देने वाली यह संस्था प्रभाव पर्व की एक नवोदित किरण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना उसी की फलित होती है, जो उसे साधना के खाद- पानी से सींचता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वरीय प्यार को पाने के लिए अपना आन्तरिक स्तर परिष्कृत करना ही सर्वश्रेष्ठ तप- साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना परमात्मा की, साधना अन्तरात्मा की और आराधना विश्वात्मा की करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सुनियोजन ही सौन्दर्य है। उसी को कला कौशल भी कहना चाहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    राजहंस दूध पीते हैं, जल छोड़ देते हैं। मोती चुगते हैं, कीड़े नहीं खाते। ऐसी व्रतशीलता निभाकर कोई भी श्रेष्ठ बन सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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