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  • योग से संबंधित विचार


    आत्मानुशासन और आत्म- संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमेश्वर जिस पर भी प्रसन्न होते हैं, उन्हें वे अधिक विचारशील, सद्भावना संपन्न और ज्ञानपरायण बनाते हैं तथा ज्ञानयोग में संलग्न होने की प्रेरणा देते हैं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग का अर्थ है- आदर्शवादिता के प्रति आत्म- समर्पण।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मानुशासन और आत्म - संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग का लक्ष्य है- जीवात्मा का विराट् चेतना से सम्पर्क जोड़कर दिव्य आदान- प्रदान का मार्ग खोल देना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्म तो सभी करते हैं, पर जब वह सदुद्देश्यों के साथ जुड़ जाता है, तो योग बन जाता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मानुशासन और आत्म- संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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