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    सीखने की इच्छा रखने वालों के लिए पग- पग पर शिक्षक हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस सोने चाँदी के जमा होने में राजा का,अग्नि का, जल का, चोर का और अपने सगे सम्बन्धियों तक का भय बढ़ जाता है, भला वह भी कोई धन है ? सच्चा धन तो आत्मज्ञान है जिसके प्राप्त होते ही मनुष्य दसों दिशाओं से निर्भय हो जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।                            


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाध्याय को जीवन में निश्चित स्थान दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विज्ञान बाहर की प्रगति है एवं ज्ञान अन्तः की अनुभूति।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक मनुष्य के ज्ञान और अज्ञान का ही परिणाम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का जितना भाग व्यवहार में लाया जा सके वही सार्थक है, अन्यथा वह गधे पर लदे बोझ के समान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्राण का ज्ञान एवं जागरण ही अमृतत्व एवं मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाध्याय एक वैसी ही आत्मिक आवश्यकता है जैसे शरीर के लिए भोजन।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान अक्षय है, उसकी प्राप्ति मृत्यु शय्या तक बन पड़े तो भी उस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वे माता- पिता धन्य हैं, जो अपनी संतान के लिए उत्तम पुस्तकों का एक संग्रह छोड़ जाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्या वह जो नम्रता सिखाए। उचित अनुचित का विश्लेषण करे और नीति मार्ग पर चलने का साहस प्रदान करे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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