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  • ज्ञान से संबंधित विचार


    विद्या वह जो नम्रता सिखाए। उचित अनुचित का विश्लेषण करे और नीति मार्ग पर चलने का साहस प्रदान करे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पढ़ना ज्ञान के नेत्र खोलने के लिए होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा ज्ञानस्वरूप है। विचार और ज्ञान के रूप में ही वह मानवीय अंतःकरण में प्रकाश और प्रेरणा उत्पन्न करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की आराधना इस विश्व का सबसे श्रेष्ठ सत्कर्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का जितना भाग व्यवहार में लाया जा सके वही सार्थक है, अन्यथा वह गधे पर लदे बोझ के समान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्यार्थी वह जिसमें ज्ञान की पिपासा हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विज्ञान बाहर की प्रगति है एवं ज्ञान अन्तः की अनुभूति।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञानदान से बढ़कर आज की परिस्थितियों में और कोई दान नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुस्तकालय हमारा गुरु है, जो अज्ञान के अन्धकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्राण का ज्ञान एवं जागरण ही अमृतत्व एवं मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा की ओर जाने वाला ज्ञानदान करना सर्वश्रेष्ठ भगवद्भक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक;   किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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