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  • प्रसन्न से संबंधित विचार


    हर परिस्थिति में प्रसन्न रहिए, निर्भय रहिए और कर्तव्य करते रहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम हर घड़ी, हर परिस्थिति में प्रसन्न रहें, क्योंकि प्रसन्नता हमारी आध्यात्मिकता का प्रमुख लक्षण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि तुमको आनन्द और शान्ति की आवश्यकता है, तो उसकी प्राप्ति का केवल यही रास्ता है- अपने को जीतो, अपनी समस्त अभिलाषाओं का अंदर रहने वाली शक्ति को पहरेदार बना दो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी रोटी- मिल खाओ ताकि तुम्हारे सभी भाई सुखी रह सकें ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हँसी- खुशी है जहाँ, तन्दुरुस्ती है वहाँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर को प्रसन्नता की जरूरत नहीं, वह हमारी चाटुकारिता का भूखा नहीं। हम उनकी प्रशंसा करते हैं- स्तुति करते हैं तो इसलिए कि सद्गुणों के समुच्चय- परमात्मा के गुणों को अपने अन्दर धारण करें।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जिसे सच्चे मन से प्यार करते हैं, उसे अग्नि परीक्षाओं में होकर गुजारते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा जिस पर अत्यन्त प्रसन्न होता है उसे नदी सी दान शीलता, सूर्य सी उदारता और पृथ्वी की सी सहन शीलता प्रदान करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वरीय प्यार को पाने के लिए अपना आन्तरिक स्तर परिष्कृत करना ही सर्वश्रेष्ठ तप- साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक अपने घर में ही देखना चाहो तो मुसकान में स्वर्ग उतरना और विग्रह के साथ जुड़ा हुआ नरक कभी भी प्रत्यक्ष देख लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रशंसकों पर ही प्रसन्न न हों। महत्त्व उन्हें भी दें जो सही आलोचना कर सकते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सुखी होना है तो प्रसन्न रहिए, निश्चिन्त रहिए, मस्त रहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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