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    परम्पराएँ नहीं प्रधान, हो विवेक का ही सम्मान।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कदम क्रान्ति के नहीं रुकेंगे, बेटा- बेटी नहीं बिकेंगे


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विवेक और पुरुषार्थ जिसके साथी हैं, वही प्रकाश प्राप्त करेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्मणि त्यज्यते प्रज्ञा।
    अर्थात्- कर्म में ही मनुष्यों की प्रज्ञा की अभिव्यक्ति होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सलाह सबकी सुनो, पर करो वह जिसके लिए तुम्हारा साहस और विवेक समर्थन करे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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