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  • अध्यात्म से संबंधित विचार


    साहस एवं विधेयात्मक दृष्टिकोण अध्यात्म का पहला पाठ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसके अन्दर ऐय्याशी, फिजूलखर्ची और विलासिता की कुर्बानी देने की हिम्मत नहीं, वे अध्यात्म से कोसों दूर हैं और मुझे प्रिय भी नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी आत्मा को सबमें- सबकी आत्मा को अपने में समाया देखना ही अध्यात्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म का अर्थ है- अपने आपको सही करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम दूसरों से भिन्न नहीं और दूसरे हमसे भिन्न नहीं, इसी मान्यता में अध्यात्मवाद का सारा रहस्य सन्निहित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तप के लक्षण हैं- शक्ति संचय, परिश्रम, उत्साह, दृढ़ता और लगन।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म परिष्कार की साधना का नाम ही अध्यात्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कुविचारों, दुर्भावनाओं, काम, क्रोध, लोभ और मोह के बंधनों को तोड़ डालने का नाम ही मुक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रेष्ठ व्यक्तित्वों के गढ़ने की टकसाल है- युगतीर्थ शान्तिकुंज।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही काम करना ठीक है, जिसे करके पछताना न पड़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म का अर्थ है- अपने आपको सही करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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