Chintan Quotes

समाज निर्माण


इक्कीसवीं सदी का गंगावतरण - (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला -22)

अत्यन्त व्यस्त, असमर्थ लोगों के लिए एक प्रतीक साधना भी युग- सन्धि पुरश्चरण के अन्तर्गत नियोजन की गई है। प्रात:काल आँख खुलते ही पाँच मिनट की इस मानसिक...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
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युग निर्माण योजना


इक्कीसवीं सदी का गंगावतरण - (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला -22)

अत्यन्त व्यस्त, असमर्थ लोगों के लिए एक प्रतीक साधना भी युग- सन्धि पुरश्चरण के अन्तर्गत नियोजन की गई है। प्रात:काल आँख खुलते ही पाँच मिनट की इस मानसिक...View More
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सफल सार्थक जीवन


प्रगतिक्रम- व्यक्तित्व में प्रगति का क्रम बराबर बना रहे, इसके चार सूत्र हैं- आत्म समीक्षा, आत्म शोधन, आत्म निर्माण एवं आत्म विकास।
() आत्म समीक्षा- हम वर्तमान में किस स्तर पर हैं तथा अगला चरण क्या हो, इस अन्तर्दृष्टि को आत्म समीक्षा की...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


प्रगतिक्रम- व्यक्तित्व में प्रगति का क्रम बराबर बना रहे, इसके चार सूत्र हैं- आत्म समीक्षा, आत्म शोधन, आत्म निर्माण एवं आत्म विकास।
() आत्म समीक्षा- हम वर्तमान में किस स्तर पर हैं तथा अगला चरण क्या हो, इस अन्तर्दृष्टि को आत्म समीक्षा की...View More
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युग निर्माण योजना



व्यक्तियों को दुःख- कष्टों से उबारना, उन्हें सुख- समृद्धि उपलब्ध कराने के कार्य तो संत- स्वभाव के महामानव हमेशा से करते रहे हैं और वर्तमान समय में भी कर रहे हैं, किन्तु युगान्तरकारी पुरुषार्थ तो ऋषि स्तर की आत्माओं द्वारा ही...View More
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सफल सार्थक जीवन


स्वार्थपरता का अनिवार्य परिणाम असंतोष और निराशा है, क्योंकि इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। इसलिए सुख की समस्या का एकमात्र उपाय इच्छा- त्याग है। बाहरी दमन के द्वारा इच्छाओं पर पूर्ण विजय प्राप्त नहीं की जा सकती; वे केवल ज्ञान...View More
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लोग बुराई और भलाई के बारे में अपने अलग- अलग दृष्टिकोण बनाते हैं और चाहते हैं कि सभी लोग उस ढंग पर चलें। एक दूसरे में दोष देखने का यही कारण है।
दूसरों के सबंध में बुरा कहने वाला मैं...View More
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सफल सार्थक जीवन


इस संसार में हर प्रकार के अवसर मौजूद हैं। यहाँ पैरों में चुभने वाले काँटे भी बहुत हैं और सुगन्ध- सुशमा से भरे- पूरे फूलों की भी कमी नहीं। यह निर्धारण करने का संकल्प, प्रयास और अधिकार पूरी तरह अपने हाथ में...View More
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समाज निर्माण


शुद्ध व्यवहार और सदाचार समाज की सुदृढ़ स्थिति के दो आधार स्तम्भ हैं। इनसे व्यक्ति का भाग्य और समाज का भविष्य विकसित होता है। शिक्षा, धन एवं भौतिक समुन्नति का सुख भी इसी बात पर निर्भर है कि लोग सद्गुणी और...View More
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भाव संवेदना


इस संसार में भावना ही प्रधान है। कर्म का भला- बुरा रूप उसी के आधार पर बंधनकारक और मुक्तिदायक बनता है। सद्भावना से प्रेरित कर्म सदा शुभ और श्रेष्ठ ही होते हैं, पर कदाचित् वे अनुपयुक्त भी बन पड़ें तो भी लोक...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


प्रशंसा का सबसे बड़ा कदम यह है कि आदमी अपनी समीक्षा करना सीखे, अपनी गलतियों को समझे- स्वीकार करे और अगला कदम यह उठाये कि अपने को सुधारने के लिए अपनी बुरी आदतों से लड़े और उन्हें हटाकर रहे। जिसने इतनी हिम्मत...View More
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समाज निर्माण


नारियाँ गुण- सौन्दर्य बढ़ायें, आभूषण नहीं। आभूषणों से सौन्दर्य बढ़ता हो सम्मान मिलता हो ,ऐसी कोई बात तो समझ में आती नहीं, उलटे शरीर के अंग दुखते है। चोरों का भय बना रहता है। आपस में ईर्ष्या, द्वेष और पारिवारिक कलह...View More
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कर्मफल और ईश्वर


यदि आप किन्हीं कठिनाइयों में है, तो इसका कारण ईश्वर नहीं है, वरन् आपके ही कुछ दोष हैं, जिन्हें आप भले ही जानते हों या न जानते हों। पाप एवं दुष्कर्म ही एक मात्र दुःख का कारण नहीं होते। अयोग्यता, मूर्खता, निर्बलता, निराशा...View More
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प्रेरक विचार


यदि आप किन्हीं कठिनाइयों में है, तो इसका कारण ईश्वर नहीं है, वरन् आपके ही कुछ दोष हैं, जिन्हें आप भले ही जानते हों या न जानते हों। पाप एवं दुष्कर्म ही एक मात्र दुःख का कारण नहीं होते। अयोग्यता, मूर्खता, निर्बलता, निराशा...View More
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भाव संवेदना


आश्वासन एवं अनुरोध :-
यह निश्चित है कि शरीर के बिना भी बहुत कुछ करते बन पड़ेगा।.................जीवित रहने की अपेक्षा शरीर के न रहने पर समर्थता एवं सक्रियता और भी अधिक बढ़ जाती है। इसी मान्यता के आधार पर...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


सुख- दुःख, हर तरह की परिस्थिति में संतुष्ट रहने को संतोष कहते है। कुसंस्कारों के परिशोधन एवं सुसंस्कारों के अभिवर्धन के लिए स्वेच्छापूर्वक जो कष्ट उठाया जाता है- वह तप कहलाता है। स्वयं के अध्ययन- विश्लेषण के लिए किया जाने वाला अध्यवसाय स्वाध्याय...View More
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भाव संवेदना


प्रेम गंगा की भांति वह पवित्र जल है, जिसे जहाँ−कहीं छिड़का जाय, वहीं पवित्रता पैदा करेगा। उसमें आदर्शों की अविच्छिन्नता जुड़ी रहती है। आदर्शरहित प्यार को ही मोह कहते हैं। दूरदर्शिता, विवेकशीलता, शालीनता, पवित्रता, सदाशयता जैसे गुणों का भरपूर समावेश प्रेम में होता...View More
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समय का सदुपयोग


संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिए असम्भव हो। प्रयत्न और पुरुषार्थ से सब कुछ पाया जा सकता है, लेकिन एक ऐसी भी चीज है, जिसे एक बार खोने के बाद कभी नहीं पाया जा सकता और...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


सोचो तुम क्या हो?
परिवर्तन संसार की जान है। जिसको मौत समझते हो, वही जीवन है। क्षण भर में तुम करोड़ों के वारिस और क्षण भर में लावारिस बन जाते हो। मेरा- तेरा, छोटा- बड़ा, अपना बेगाना दिल से मिटा दो। यह शरीर...View More
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सफल सार्थक जीवन


मनुष्य की गौरव पूर्ण परिभाषा :-
कोई हमें गुमराह न कर सके, इतना हममें विवेक हो। कोई हम पर दबाव न डाल सके, इतना हममें आत्मबल हो। हम अपनी कृति को प्रामाणिक बना सकें। इतना हममें आत्मविश्वास हो, हम अन्याय के View More
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भाव संवेदना


अन्तर्वेदना एवं कर्तव्य बोध :-
हमारी कितनी रातें सिसकते बीती है। कितनी बार हम बालकों की तरह बिलख- बिलख कर रोये हैं- उसे कोई कहां जानता है? लोग हमें संत, सिद्ध, ज्ञानी मानते है। कोई लेखक, विद्वान, वक्ता, नेता, समझते है, पर किसने हमारा...View More
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भाव संवेदना


उम्मीदों को आघात न पहुँचाए :-
कुसंस्कारी परिजन नरक में रहने वाले यमदूतों से भी अधिक दुःख देते है। इसका अनुभव उन्हें भली- भांति होगा, जिन्हें स्त्री, पति, पुत्र, पुत्री, भाई- भतीजे, दामाद, बहनोई आदि कर्कश, उद्दण्ड एवं कुमार्गगामी मिले है। उनकी...View More
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युग निर्माण योजना


अनुदान की कीमत चुकाएँ :-
युग की पुकार पर कोई आया। अंधेरी तमिस्रा में तिल- तिल करके दीपक की तरह जला। जितना सम्भव था प्रकाश फैलाया, पर तेल और बाती की अपनी सीमा थी। वह तीन प्रहर जल ली, चौथा- प्रहर उसके...View More
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भाव संवेदना


कुछ भी नहीं असम्भव होता
तू सूर्य और चन्द्रमा को अपने पास नहीं उतार सका, इसका कारण उनकी दूरी नहीं, वरन् तेरी दूरी की भावना है। तू संसार को बदल नहीं पाया इसका कारण संसार की अपरिवर्तनशीलता नहीं, वरन् तुम्हारे...View More
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प्रेरक विचार


कुछ भी नहीं असम्भव होता
तू सूर्य और चन्द्रमा को अपने पास नहीं उतार सका, इसका कारण उनकी दूरी नहीं, वरन् तेरी दूरी की भावना है। तू संसार को बदल नहीं पाया इसका कारण संसार की अपरिवर्तनशीलता नहीं, वरन् तुम्हारे...View More
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युग निर्माण योजना


कुछ भी नहीं असम्भव होता
तू सूर्य और चन्द्रमा को अपने पास नहीं उतार सका, इसका कारण उनकी दूरी नहीं, वरन् तेरी दूरी की भावना है। तू संसार को बदल नहीं पाया इसका कारण संसार की अपरिवर्तनशीलता नहीं, वरन् तुम्हारे...View More
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सफल सार्थक जीवन


गलती से सीखें :-
गलती करना बुरा नहीं है, बल्कि गलती को न सुधारना बुरा है। संसार के महान् पुरुषों ने भी अनेक तरह की गलतियाँ की है। रावण जैसा विद्वान् अपने दुष्कृत्यों से राक्षस जैसा बन गया। रत्नाकर (वाल्मीकि)...View More
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भाव संवेदना


गुरुवाणी :-
लोग कहें कि तुम्हारे गुरु से बड़ा कोई ज्ञानी है, तो मान लेना। यदि कोई कहे कि तुम्हारे गुरु से बड़ा कोई दूसरा तपस्वी और सिद्ध- समर्थ है तो भी मान लेना पर यदि कोई कहे कि तुम्हारे...View More
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सफल सार्थक जीवन


सद्गुरु के स्वर:-
मेरे विचारों में, मेरे साहित्य में मेरी इच्छाओं को ढूंढो। उन शिक्षाओं का अनुसरण करो जो मेरे गुरु ने मुझे दी थी और जिसे मैने तुम्हें दिया है। सदैव अपनी दृष्टि लक्ष्य पर स्थिर रखो। अपने...View More
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प्रेरक विचार


सद्गुरु के स्वर:-
मेरे विचारों में, मेरे साहित्य में मेरी इच्छाओं को ढूंढो। उन शिक्षाओं का अनुसरण करो जो मेरे गुरु ने मुझे दी थी और जिसे मैने तुम्हें दिया है। सदैव अपनी दृष्टि लक्ष्य पर स्थिर रखो। अपने...View More
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