Chintan Quotes

मानवीय गरिमा


सफलता का पथ निश्चय ही बड़ा कठिन और दुर्गम होता है। उसको सरल और प्रशस्त बनाने में मनुष्य की इच्छा शक्ति का बड़ा उपयोग है। इच्छा शक्ति की दृढ़ता और प्रबलता मनुष्य को पराक्रमी, पुरुषार्थी और धीर- गंभीर बना देती...View More
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जिसे ईमानदारी का जीवन जीना हो, उसे पूर्व तैयारी मितव्ययी रहने की- सादा जीवन जीने की करनी चाहिए। जो कम में गुजारा करना जानता है, उसी के लिए यह संभव है कि कम आमदनी से संतोषपूर्वक निर्वाह कर ले। ईमानदारी से आय सीमित...View More
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संसार में कोई व्यक्ति बुरा नहीं है। सबमें श्रेष्ठताएँ भरी हुई हैं। आवश्यकता एक ऐसे व्यक्ति की है, जो अच्छाई को लगातार प्रोत्साहन देकर बढ़ाता रहे। कैसे दुःख की बात है कि हम मनुष्य को उसकी त्रुटियों के लिए तो सजा...View More
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आप अवकाश के क्षणों को व्यर्थ ही सिनेमा, क्लबों, व्यर्थ की बातचीत, ताश, चौपड़, गपबाजी, चुहल तथा बेमतलब की बातों में नष्ट कर देते हैं। ये तथाकथित मनोरंजन के साधन स्वस्थ नहीं है। जबकि स्वाध्याय से आप अपनी गुप्त शक्तियों का विकास करते हैं...View More
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विचार फालतू बात नहीं है। वह एक संज्ञा है। एक मजबूत ताकत है। उसका स्पष्ट स्वरूप है। उसमें जीवन है। वह स्वयं ही हमारा मानसिक जीवन है। वह सत्य है। विचार ही मनुष्य का आदि रूप है। पानी में लकड़ी, पत्थर, गोली आदि फेंकने...View More
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निराश कभी मत होइए। उन्नति के लिए, अच्छी आदतों के लिए, अपने शुभ संकल्पों की सिद्धि के लिए सतत प्रयत्न करते रहिए। बार- बार प्रयत्न करने से ही आपको उत्साह मिलेगा, सफलता मिलेगी। आपके कठिन कार्य सरल होते जायेंगे। प्रत्येक प्रयत्न, आपकी प्रत्येक छोटी-...View More
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वाणी से असत्य वचन, चापलूसी, परनिन्दा, कटुभाषण, व्यर्थ वार्तालाप का त्याग करना चाहिए, क्योंकि ये अशुभ और अनैतिक हैं। इनसे जीवन में कलह, पश्चाताप, लड़ाई- झगड़े, अशान्ति पैदा हो सकते हैं। परस्पर संबंध खराब हो जाते हैं। उन सभी दृश्यों तथा प्रसंगों से दूर रहें जिनसे...View More
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अगर हम चाहते हैं कि बच्चा हमारा आज्ञाकारी बने, जो बात हम कहें वह उसकी उपयोगिता को समझे- स्वीकार करे तथा उसी के अनुसार आचरण करे तो हमें पहले उसका श्रद्धास्पद बनना होगा। बालकों के लिए श्रद्धेय बनने का एकमात्र उपाय है-...View More
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स्पष्ट है कि मनोबल छोटी- छोटी सफलताएँ प्राप्त करते- करते विकसित होता है। वह आसमान से किसी पर नहीं टपकता। छोटे कदम, छोटे प्रयोग, छोटी सफलता का क्रम चलता रहे तो मनुष्य क्रमशः अधिक आत्म विश्वासी बनता जाता है और इस आधार पर...View More
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किसी का सम्मान करने का अर्थ है- बदले में उसका सम्मान पाना। दूसरे कम कीमत में सम्मान पाने की बात बन ही नहीं सकती। सादगी से रहा जाय, शालीनता बरती जाये और दूसरों को संतुष्ट रखकर उन पर अपना प्रभाव छोड़ने...View More
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समर्पण की सच्ची साधना है- अंतःकरण में न कोई छल, न छद्म। अपनी बौद्धिक क्षमताएँ, यश, सक्रियता, प्रगति सब ध्येय के प्रति अर्पित हों। यह सौभाग्य जिन प्रयोजनों को मिल जाते हैं, चाहे वे सांसारिक हों या आध्यात्मिक, उनकी सफलता की आधी मंजिल तत्काल...View More
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आज मित्रता की आड़ लेकर शत्रुता बरतने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। इसे चतुरता, कुशलता समझा जाता है और इस प्रयास में सफल व्यक्ति आत्म- श्लाघा भी बहुत करते हैं। साथी को मित्रता के जाल में फँसाकर उसकी बेखबरी का- भोलेपन...View More
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अपने साथ पक्षपात की आदत से प्रायः सभी लोग घिरे रहते हैं। दूसरों की आलोचना करने के लिए काफी तथ्य संग्रह कर लिये जाते हैं, पर अपनी खामियाँ, खराबियाँ ढूँढने के लिए किसी की रुचि नहीं होती। इतना ही नहीं, कोई वैसा...View More
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अंतरात्मा में यदि किसी दिव्य वाणी को सुनने की शक्ति हो तो अपने भीतर बैठा हुआ कोई ‘नैतिक’ यह कहते हुए पाया जायेगा कि जो सुख- साधन समाज के अनुग्रह से मिले हैं, उन्हें लूट का माल न समझा जाय,...View More
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नियति क्रम से हर वस्तु का- हर व्यक्ति का अवसान होता है। मनोरथ और प्रयास भी सर्वदा सफल कहाँ होते हैं। यह सब अपने ढंग से चलता रहे, पर मनुष्य भीतर से टूटने न पाये इसी में उसका गौरव है। जैसे समुद्र...View More
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ज्ञानयोग की साधना यह है कि मस्तिष्कीय गतिविधियों पर- विचारधाराओं पर विवेक का आधिपत्य स्थापित किया जाय। चाहे जो कुछ सोचने की छूट न हो। चाहे जिस स्तर की चिंतन प्रक्रिया अपनाने न दी जाय। औचित्य- केवल औचित्य- मात्र औचित्य ही चिंतन का...View More
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वर्तमान ही हमारा है। हमें तो पहले आज की परवाह करनी चाहिए। यह सुंदर सुहावना आज, यह उल्लासपूर्ण आज ही हमारी अमूल्य निधि है। यह आज ही हमारे हाथ में है। यह हमारा साथी है। इस आज की ही प्रतिष्ठा कीजिए। आज के साथ...View More
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उपासना का सार है- सर्वगुण संपन्न ईश्वर को अपना घनिष्ठतम जीवन सहचर अनुभव किया जाना और अपने शरीर, मन तथा अंतःकरण को ईश्वर अर्पण करके उस पर दिव्य सत्ता का अधिकार स्वीकार करना। जो इस स्तर की उपासना का अभ्यासी होगा, वह...View More
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किसी भी व्यक्ति अथवा समाज की सभ्यता की गहराई का पता उनके उत्सवों, संस्कारों एवं समारोहों के समय ही चलता है। जिनके खुशी मनाने के तरीके सादे, सरल, शिष्ट एवं सुरुचिपूर्ण होते हैं, आज के युग में वे समाज ही सभ्य कहे जा...View More
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चिन्ता से मुक्ति का एकमात्र उपाय है- हर समय काम में लगे रहना। निठल्ले व्यक्ति को ही चिन्ता जैसी पिशाचिनी घेरती है। जो व्यक्ति कर्मरत है, प्रगतिशील है, चिन्ताएँ उसे किसी प्रकार भी नहीं घेर सकतीं। चिन्ता का जन्मस्थान एवं निवासस्थान दोनों ही...View More
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बुरे विचारों से बचने के लिए अवांछनीय साहित्य का पढ़ना बंद कर देना अधूरा उपचार है। उपचार पूरा तब होता है, जब उसके स्थान पर सद्साहित्य का अध्ययन किया जाय। मानव मस्तिष्क कभी खाली नहीं रह सकता। उसमें किसी न किसी...View More
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मनुष्य सामाजिक प्राणी है। सामाजिक जीवन का अर्थ है- मिल जुलकर स्नेह, सौहार्द्रपूर्वक रहना। स्वार्थ एवं संघर्ष सामाजिक जीवन के प्रतिकूल भाव हैं। सफल सामाजिक जीवन तभी संभव है, जब उसका प्रत्येक सदस्य सौम्य, सहनशील और शान्त स्वभाव वाला हो। इस स्थिति में...View More
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आशा, विश्वास और परिवर्तन के अटल विधान में आस्था रखने के साथ समय रूपी महान् चिकित्सक में विश्वास रखिए। समय बड़ा बलवान् और उपचारक होता है। वह धैर्य रखने पर मनुष्य के बड़े- बड़े संकटों को ऐसे टाल देता है जैसे वह...View More
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स्वार्थ वृत्ति एक जहरीले साँप की तरह होती है। यह जब अपना फन फैलाती है तो शत्रु- मित्र का विचार किए बिना समान रूप से सबको डस लेती है। एक स्वार्थ वृत्ति से ही मनुष्य में न जाने और कितनी दूषित वृत्तियाँ...View More
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विचार मनुष्य जीवन के बनाने अथवा बिगाड़ने में बहुत बड़ा योगदान किया करते हैं। मानव जीवन और उसकी क्रियाओं पर विचारों का आधिपत्य रहने से उन्हीं के अनुसार जीवन का निर्माण होता है। असद्विचार रखकर यदि कोई चाहे कि वह अपने...View More
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भूलकर भी मन में यह विचार मत आने दीजिए कि मनुष्य हाड़- मांस का एक पुतला है। पाप से उत्पन्न हुआ है और पाप में ही प्रवृत्त रहता है। यह विचार स्वयं ही एक बड़ा पाप है। अपने प्रति निकृष्ट दृष्टिकोण रखने...View More
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भविष्य हमेशा अनिश्चित है। वर्तमान निश्चित है। अतः अपनी निश्चित निधि को खोकर अनिश्चित के लिए उलझे रहना भविष्य के प्रति वर्तमान का अनादर करना है। वैसे भविष्य की चिन्ता करना बुरा नहीं है। उसकी एक निश्चित योजना रूपरेखा बनाकर ही वर्तमान...View More
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अच्छाई इसलिए पनप नहीं पाती कि उसका शिक्षण करने वाले ऐसे लोग नहीं निकल पाते, जो अपनी एकनिष्ठा के द्वारा दूसरों की अंतरात्मा पर अपनी छाप छोड़ सकें। अपने अवगुणों को छिपाने के लिए या सस्ती प्रशंसा प्राप्त करने के लिए...View More
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प्रत्येक व्यक्ति स्वयमेव ही अपने आपका एक चलता- फिरता, बोलता विज्ञापन है। यह भी सच है कि विज्ञापन जैसा होगा, उसका प्रभाव भी वैसा ही पड़ेगा। बातचीत, वेशभूषा, रहन- सहन से मनुष्य का व्यक्तित्व प्रदर्शित होता है। जिन बुरी आदतों से अपना गलत विज्ञापन...View More
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आज वक्ता और लेखक स्वयं वैसा आचरण नहीं करते जैसा कि दूसरों से कराना चाहते हैं, जबकि चारित्रिक शिक्षा के लिए यह आवश्यक है कि उपदेशक दूसरों के सामने अपना आदर्श उपस्थित करें। यदि सद्भावनाओं की संपत्ति को संसार में बढ़ाया...View More
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